Edited By Sarita Thapa,Updated: 20 Sep, 2026 08:01 AM

हिंदू धर्म में हर एक एकादशी का बहुत खास महत्व है। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकदाशी को जलझूलनी एकदाशी, पद्मा एकादशी या परिवर्तिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, क्षीरसागर में योगनिद्रा में लीन भगवान विष्णु इस दिन अपनी करवट...
Jaljhulani Ekadashi 2026 : हिंदू धर्म में हर एक एकादशी का बहुत खास महत्व है। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकदाशी को जलझूलनी एकदाशी, पद्मा एकादशी या परिवर्तिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, क्षीरसागर में योगनिद्रा में लीन भगवान विष्णु इस दिन अपनी करवट बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी भी कहते हैं। इस पावन अवसर पर भगवान विष्णु के बाल स्वरूप को पालकी में विराजमान कराकर जलाशयों के किनारे ले जाया जाता है और जल झूला कराया जाता है। तो आइए जानते हैं जलझूलनी एकादशी की पूजा के शुभ मुहूर्त और इसका धार्मिक महत्व के बारे में-
जलझूलनी एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 21 सितंबर की रात करीब 8 बजे शुरू होकर 22 सितंबर की रात करीब 9:43 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार, 2026 में परिवर्तिनी एकादशी यानी जलझूलनी एकादशी 22 सितंबर को मनाई जाएगी।
जलझूलनी एकादशी का धार्मिक महत्व
शास्त्रों के अनुसार, इस एकादशी का व्रत करने से साधक को वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि देवशयनी एकादशी से सोए हुए भगवान विष्णु इस दिन करवट लेते हैं, जिससे सृष्टि में नव-ऊर्जा का प्रवाह होता है। इसलिए इस दिन उनकी विशेष पूजा से जीवन के सभी दुख और परेशानियां दूर होती हैं। जो व्यक्ति इस दिन सच्चे मन से व्रत और दान-पुण्य करता है, उसके पूर्व जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं और मृत्यु के पश्चात उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।