Edited By Sarita Thapa,Updated: 19 Jan, 2026 02:18 PM

वर्तमान समय में अपनी सादगी और आध्यात्मिक ज्ञान के लिए विख्यात संत श्री प्रेमानंद जी महाराज के वचनों को करोड़ों लोग सुनते हैं। अक्सर अपने सत्संग में महाराज जी जीवन की उन बारीकियों के बारे में बताते हैं, जिन्हें हम अनजाने में अनदेखा कर देते हैं।
Premanand Maharaj Teachings : वर्तमान समय में अपनी सादगी और आध्यात्मिक ज्ञान के लिए विख्यात संत श्री प्रेमानंद जी महाराज के वचनों को करोड़ों लोग सुनते हैं। अक्सर अपने सत्संग में महाराज जी जीवन की उन बारीकियों के बारे में बताते हैं, जिन्हें हम अनजाने में अनदेखा कर देते हैं। हाल ही में उन्होंने एक ऐसी बड़ी गलती के बारे में सचेत किया है, जिसे उन्होंने महापाप की श्रेणी में रखा है। तो आइए जानते हैं कि वो कौन सी एक गलती है जिसे प्रेमानंद महाराज ने भूलकर भी न करने के लिए कहा है।
क्या है वह क्षमा न किया जाने वाली गलती ?
प्रेमानंद महाराज के अनुसार, किसी भी संत, महात्मा या ईश्वर के भक्त की निंदा करना सबसे बड़ा अपराध है। इसे वैष्णव अपराध या संत अपमान कहा जाता है। महाराज जी बताते हैं कि भगवान अपने अपमान को तो एक बार क्षमा कर सकते हैं, लेकिन अपने भक्त या किसी सच्चे संत का अपमान वे कभी बर्दाश्त नहीं करते।
महाराज जी कहते हैं कि हम अक्सर चर्चा के दौरान दूसरों की बुराई करने लगते हैं। अगर वह व्यक्ति संत या भक्त है, तो उस निंदा का फल हमारे संचित पुण्यों को नष्ट कर देता है। शास्त्रों का हवाला देते हुए महाराज जी समझाते हैं कि भक्त भगवान का हृदय होता है। यदि आप हृदय को चोट पहुँचाएंगे, तो शरीर को कष्ट होना स्वाभाविक है। ऐसे पाप का फल इसी जन्म में भोगना पड़ता है।

क्यों नहीं मिलती माफी ?
महाराज जी का तर्क है कि यदि आप भगवान से अपराध करते हैं, तो संत की शरण में जाकर माफी मिल सकती है। लेकिन यदि आप संत से ही अपराध कर बैठें, तो फिर कोई दूसरा मार्ग नहीं बचता। अगर अनजाने में किसी की निंदा हो गई है, तो महाराज जी सलाह देते हैं कि तुरंत उस व्यक्ति से मानसिक या प्रत्यक्ष रूप से क्षमा मांगें और अपनी वाणी को केवल 'नाम जप' में लगाएं।

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