Edited By Niyati Bhandari,Updated: 06 Mar, 2026 01:19 PM

Chaitra Navratri 2026: हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक महत्व रखने वाला माना जाता है। चैत्र मास में आने वाली नवरात्रि को चैत्र नवरात्रि कहा जाता है। इन नौ दिनों में भक्त पूरे श्रद्धा भाव से माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की...
Chaitra Navratri 2026: हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक महत्व रखने वाला माना जाता है। चैत्र मास में आने वाली नवरात्रि को चैत्र नवरात्रि कहा जाता है। इन नौ दिनों में भक्त पूरे श्रद्धा भाव से माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं। मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान की गई पूजा, साधना और उपवास से देवी दुर्गा प्रसन्न होकर भक्तों के जीवन के संकट दूर करती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।
चैत्र नवरात्रि की शुरुआत के साथ ही हिंदू नववर्ष का भी शुभारंभ माना जाता है। इस दौरान घरों और मंदिरों में घट स्थापना (कलश स्थापना) की जाती है, जो नवरात्रि पूजन की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया मानी जाती है।
Chaitra Navratri 2026 Date: कब से शुरू होगी चैत्र नवरात्रि?
हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होती है।
प्रतिपदा तिथि आरंभ: 19 मार्च 2026, सुबह 06:52 बजे
प्रतिपदा तिथि समाप्त: 20 मार्च 2026, सुबह 04:52 बजे
ऐसे में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च 2026 से शुरू होगी और 27 मार्च 2026 को राम नवमी के साथ इसका समापन होगा। इन नौ दिनों में देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है और कई भक्त पूरे नौ दिन का व्रत भी रखते हैं।

Chaitra Navratri 2026 Kalash Sthapana Muhurat
नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना करना अत्यंत शुभ माना जाता है। वर्ष 2026 में कलश स्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे।
प्रथम शुभ मुहूर्त
सुबह 06:52 बजे से 07:43 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त
दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक
इन शुभ मुहूर्तों में कलश स्थापना करने से पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है।

घट स्थापना के समय रखें ये जरूरी सावधानियां
कलश स्थापना नवरात्रि पूजा की शुरुआत का प्रतीक होती है, इसलिए इस दौरान कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना आवश्यक माना जाता है।
कलश स्थापना से पहले पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।
पूजा में इस्तेमाल होने वाला कलश अंदर से स्वच्छ होना चाहिए।
खंडित या टूटा हुआ कलश प्रयोग में न लें।
एक बार कलश स्थापना होने के बाद उसे नवरात्रि के पूरे नौ दिन तक न हटाएं।
कलश को अपवित्र हाथों से स्पर्श न करें।
जहां घट स्थापना की जाए, उस स्थान को खाली न छोड़ें।
पूजा स्थल के आसपास शुद्धता बनाए रखें।
चैत्र नवरात्रि के दौरान पालन करें ये नियम
नवरात्रि का व्रत जितना पवित्र माना जाता है, उतने ही इसके नियमों का पालन भी महत्वपूर्ण होता है।
नवरात्रि के पहले दिन सही मुहूर्त में ही कलश स्थापना करें।
घर और मंदिर की साफ-सफाई अवश्य करें।
इन नौ दिनों में तामसिक भोजन जैसे मांस-मदिरा का सेवन न करें।
नवरात्रि के दौरान बाल और नाखून काटने से बचें।
दिन में अधिक सोने से परहेज करें।
पूजा के दौरान सात्विक भोजन और संयमित जीवनशैली अपनाएं।
नवरात्रि का धार्मिक महत्व
हिंदू मान्यता के अनुसार नवरात्रि देवी शक्ति की आराधना का सबसे शुभ समय माना जाता है। इन दिनों भक्त दुर्गा माता के नौ स्वरूपों की पूजा कर उनकी कृपा प्राप्त करते हैं। नवरात्रि के दौरान किए गए जप, तप और व्रत से व्यक्ति के जीवन के कष्ट दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
चैत्र नवरात्रि केवल एक धार्मिक पर्व ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक भी है। यदि श्रद्धा और विधि-विधान से घट स्थापना और पूजा की जाए तो माता दुर्गा की कृपा से जीवन के सभी संकट दूर होने की मान्यता है।
