Kharmas March 2026: 15 मार्च से शुरू होगा खरमास, 14 अप्रैल तक बंद रहेंगे शादी-विवाह और सभी मांगलिक कार्य

Edited By Updated: 07 Mar, 2026 12:45 PM

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Kharmas March 2026: सनातन धर्म में खरमास का विशेष धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व माना जाता है। यह एक ऐसी अवधि होती है जिसे परंपरागत रूप से अशुभ समय माना जाता है। इस दौरान शादी-विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नामकरण, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।

Kharmas March 2026: सनातन धर्म में खरमास का विशेष धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व माना जाता है। यह एक ऐसी अवधि होती है जिसे परंपरागत रूप से अशुभ समय माना जाता है। इस दौरान शादी-विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नामकरण, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। मार्च 2026 में भी खरमास लगने जा रहा है, लेकिन कई लोगों के मन में यह सवाल है कि खरमास 14 मार्च से शुरू होगा या 15 मार्च से। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इसका सही समय स्पष्ट हो गया है। आइए विस्तार से जानते हैं कि खरमास कब से शुरू होगा और इस दौरान शुभ कार्य क्यों नहीं किए जाते।

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2026 में खरमास कब से शुरू होगा?
ज्योतिष गणना के अनुसार सूर्य देव 15 मार्च 2026 को कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य का यह राशि परिवर्तन रात 01 बजकर 08 मिनट पर होगा।

सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करते ही खरमास की शुरुआत हो जाएगी। इस दिन मीन संक्रांति का पर्व भी मनाया जाएगा।
खरमास प्रारंभ: 15 मार्च 2026
समाप्ति: 14 अप्रैल 2026

इस पूरे एक महीने की अवधि को ज्योतिष में शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। इसलिए इस दौरान शादी-विवाह समेत कई मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है।

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खरमास में कौन-कौन से काम नहीं किए जाते?
खरमास के दौरान परंपरागत रूप से कई शुभ कार्यों को टाल दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में निम्न कार्य नहीं किए जाते: शादी-विवाह, सगाई या रोका, गृह प्रवेश, नामकरण संस्कार, मुंडन संस्कार, नया व्यापार या बिजनेस शुरू करना और किसी बड़े प्रोजेक्ट की शुरुआत। हालांकि इस समय पूजा-पाठ, दान-पुण्य और आध्यात्मिक कार्यों को बहुत शुभ माना जाता है।

खरमास में शुभ कार्य क्यों नहीं किए जाते?
धर्म शास्त्रों और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार जब सूर्य देव धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तब खरमास की अवधि शुरू होती है। इन दोनों राशियों का स्वामित्व गुरु बृहस्पति के पास होता है। ज्योतिष के अनुसार इस दौरान सूर्य की ऊर्जा और प्रभाव थोड़ा मंद हो जाता है, जिससे उनकी शुभता कम हो जाती है।

किसी भी शुभ और मांगलिक कार्य को सफल बनाने के लिए सूर्य और गुरु दोनों ग्रहों का मजबूत और शुभ होना जरूरी माना जाता है। लेकिन जब सूर्य इन राशियों में प्रवेश करते हैं, तो गुरु का प्रभाव भी कमजोर हो जाता है। यही कारण है कि इस अवधि में विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है।

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खरमास में क्या करना होता है शुभ?
खरमास को भले ही मांगलिक कार्यों के लिए अशुभ माना जाता हो, लेकिन धार्मिक दृष्टि से यह समय पूजा-पाठ और दान-पुण्य के लिए बहुत शुभ माना जाता है।

इस दौरान इन कार्यों को करना लाभकारी माना जाता है। ऐसा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक लाभ मिलने की मान्यता है। भगवान विष्णु और सूर्य देव की पूजा। गरीबों को दान देना। गीता या धार्मिक ग्रंथों का पाठ। तीर्थ यात्रा। ध्यान और साधना।

ज्योतिषीय गणना के अनुसार 15 मार्च 2026 से खरमास की शुरुआत होगी, जो 14 अप्रैल 2026 तक चलेगा। इस दौरान शादी-विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों को टालना शुभ माना जाता है। हालांकि यह समय पूजा-पाठ, दान और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में भगवान की भक्ति और सेवा करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।

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