Edited By Sarita Thapa,Updated: 21 Mar, 2026 08:36 AM

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के तीन दिवसीय ब्रज दौरे का सबसे खास और चर्चा में रहने वाला पल 20 मार्च 2026 की सुबह आया, जब उन्होंने वृंदावन के विख्यात संत प्रेमानंद जी महाराज से मुलाकात की। यह मिलन आध्यात्मिक शांति और सादगी का एक अद्भुत उदाहरण था।
President Draupadi Murmu meet Premanand Maharaj : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के तीन दिवसीय ब्रज दौरे का सबसे खास और चर्चा में रहने वाला पल 20 मार्च 2026 की सुबह आया, जब उन्होंने वृंदावन के विख्यात संत प्रेमानंद जी महाराज से मुलाकात की। यह मिलन आध्यात्मिक शांति और सादगी का एक अद्भुत उदाहरण था। राष्ट्रपति मुर्मू सुबह लगभग 7:30 बजे वृंदावन स्थित श्री हित राधा केली कुंज आश्रम पहुंंचीं। भारी सुरक्षा के बीच हुई यह मुलाकात लगभग 27 मिनट तक चली। आश्रम पहुंचने पर महाराज जी ने राधे-राधे कहकर राष्ट्रपति का स्वागत किया।
किन विषयों पर हुई चर्चा ?
नाम जप की महिमा: प्रेमानंद महाराज ने राष्ट्रपति को नाम जप के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि ईश्वर का नाम जपना ही मनुष्य जीवन के उद्धार का सबसे सरल मार्ग है।
ब्रज की परंपरा: चर्चा के दौरान ब्रज की समृद्ध सांस्कृतिक और भक्ति परंपराओं पर भी बात हुई। महाराज जी ने ब्रज के भक्ति भाव और यहां की अद्वितीय आध्यात्मिक विरासत के बारे में जानकारी साझा की।
यमुना संरक्षण और समाज सेवा: महाराज जी ने यमुना नदी के संरक्षण की आवश्यकता और निस्वार्थ भाव से समाज सेवा करने के महत्व पर जोर दिया।
जन्मदिन की बधाई: संयोगवश, यह मुलाकात महाराज जी के जन्मदिन वाले हफ्ते में हुई। राष्ट्रपति ने उन्हें हाथ जोड़कर प्रणाम किया और उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हुए जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं।
राष्ट्रपति का अनुभव
राष्ट्रपति मुर्मू ने महाराज जी के सरल जीवन और उनके आध्यात्मिक उपदेशों की काफी सराहना की। उन्होंने कहा कि संत समाज को सही दिशा दिखाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मुलाकात के अंत में आश्रम की ओर से राष्ट्रपति को प्रसाद के रूप में चुनरी, माला और स्मृति चिह्न भेंट किया गया।

दौरे के अन्य मुख्य पड़ाव
इस्कॉन और प्रेम मंदिर: इससे पहले राष्ट्रपति ने इस्कॉन मंदिर में आरती की और प्रेम मंदिर में भव्य लेजर शो का आनंद लिया।
अयोध्या कनेक्शन: मथुरा आने से पहले राष्ट्रपति ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर की दूसरी मंजिल पर श्री राम यंत्र की स्थापना भी की थी।
गोवर्धन परिक्रमा: अपने दौरे के आखिरी दिन 21 मार्च को वह गोवर्धन में दानघाटी मंदिर के दर्शन और सात कोस की परिक्रमा के साथ अपनी यात्रा का समापन करेंगी।
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