Edited By Pardeep,Updated: 16 May, 2026 01:58 AM

ओडिशा से एक ऐसी झकझोर देने वाली खबर सामने आई है, जिसने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं और आपातकालीन व्यवस्थाओं के दावों की पोल खोलकर रख दी है। कटक से भुवनेश्वर ले जाए जा रहे एक गंभीर मरीज की जान इसलिए चली गई क्योंकि उसे ले जा रही एम्बुलेंस का बीच रास्ते में...
नेशनल डेस्कः ओडिशा से एक ऐसी झकझोर देने वाली खबर सामने आई है, जिसने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं और आपातकालीन व्यवस्थाओं के दावों की पोल खोलकर रख दी है। कटक से भुवनेश्वर ले जाए जा रहे एक गंभीर मरीज की जान इसलिए चली गई क्योंकि उसे ले जा रही एम्बुलेंस का बीच रास्ते में पेट्रोल खत्म हो गया और उसमें लगा ऑक्सीजन सिलेंडर भी खाली निकला। इस लापरवाही ने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां उजाड़ दी हैं।
काठजोड़ी पुल पर 'मौत' का इंतजार
मिली जानकारी के मुताबिक, केंद्रापड़ा इलाके के एक युवक ने जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया था, जिसके बाद उसे इलाज के लिए कटक के एससीबी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिए भुवनेश्वर रेफर कर दिया। लेकिन एम्बुलेंस जैसे ही कटक से निकलकर काठजोड़ी नदी पुल पर पहुंची, अचानक उसका ईंधन खत्म हो गया और वाहन वहीं खड़ा हो गया।
दोहरी मार: न तेल बचा, न सांसें देने वाली ऑक्सीजन
मृतक के परिजनों का आरोप है कि एम्बुलेंस केवल पेट्रोल की कमी के कारण ही नहीं रुकी, बल्कि उसमें मौजूद ऑक्सीजन सिलेंडर भी पूरी तरह खत्म था। जब मरीज की हालत बिगड़ने लगी और उसे कृत्रिम सांस की जरूरत थी, तब एम्बुलेंस में कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं मिली। काफी देर तक बीच पुल पर मदद का इंतजार करने के दौरान युवक की स्थिति लगातार बिगड़ती गई और उसने तड़पते हुए वहीं दम तोड़ दिया।
परिजनों का फूटा गुस्सा, जांच की मांग
इस घटना के बाद मृतक के परिजनों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि अगर समय रहते अस्पताल पहुंचा दिया जाता या एम्बुलेंस में पर्याप्त ऑक्सीजन होती, तो युवक की जान बचाई जा सकती थी। पीड़ित परिवार ने एम्बुलेंस सेवा प्रदाता के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। इस घटना ने पूरे राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और प्रशासन अब मामले की जांच की बात कह रहा है।