Edited By Sarita Thapa,Updated: 25 Aug, 2026 10:31 AM

रक्षाबंधन का पावन पर्व भाई-बहन के अटूट प्यार और विश्वास का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाईयों की लंबी आयु, सफलता और सुरक्षा के लिए उनकी कलाई में राखी बांधती है। इस साल रक्षाबंधन का त्योहार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा।
Raksha Bandhan 2026 Rules : रक्षाबंधन का पावन पर्व भाई-बहन के अटूट प्यार और विश्वास का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाईयों की लंबी आयु, सफलता और सुरक्षा के लिए उनकी कलाई में राखी बांधती है। इस साल रक्षाबंधन का त्योहार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा। लेकिन अक्सर कई परिवारों में यह कन्फ्यूजन की स्थिति बनी रहती है कि यदि दो या दो से ज्यादा भाई हों, तो सबसे पहले किसकी कलाई में रक्षासूत्र बांधी चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, रक्षाबंधन पर राखी बांधने के लिए कुछ नियम तैय किए गे हैं। तो आइए जानते हैं कि एक से ज्यादा भाई होने पर सबसे पहले राखी किसे बांधी चाहिए।
सबसे पहले किसे बांधनी चाहिए राखी?
प्रथम रक्षासूत्र
शास्त्रों के अनुसार, किसी भी शुभ काम या त्योहार पर सबसे पहला हक अपने इष्ट देव का होता है। भाई की कलाई पर राखी बांधने से पहले सबसे पहली राखी अपने कुलदेवता, भगवान गणेस या कृष्ण या शिवजी को अर्पित करनी चाहिए। ऐसा करने से पूजा पूरी मानी जाती है और भाई पर ईश्वर की कृपा बनी रहती है।
ज्येष्ठ भाई को प्राथमिकता
अपने इष्ट देव को राखी अर्पित करने के बाद, बहनों को सबसे पहले घर के सबसे बड़े भाई को राखी बांधनी चाहिए। सनातन परंपरा क् अनुसार, बड़े भाई को पिता के बराबर स्थान दिया जाता है, इसलिए उनका सम्मान करते हुए सबसे पहले बड़े भाई को तिलक करने के बाद उसकी कलाई में राखी बांधें।

यदि जुड़वां भाई हों
यदि किसी घर में भाई जुड़वां हैं, तो जिनका जन्म पहले हुआ है, उन्हें पहले राखी बांधनी चाहिए।
चचेरे, ममेरे या अन्य भाई
यदि सगे और रिश्ते के भाई चचेरे, ममेरे, फुफेरे एक साथ मौजूद हैं, तो पहले सगे भाई को और तत्पश्चात अन्य भाइयों को उनकी उम्र के हिसाब से राखी बांधें।
रक्षाबंधन पर ध्यान रखें ये 3 जरूरी नियम
भाईयों को राखी बांधते न से पहले बैठने की दिशा का खास ध्यान रखना चाहिए। राखी बांधते समय भाई का मुख हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। बहन का मुख पश्चिम दिशा की ओर हो सकता है। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके राखी बांधना अशुभ माना जाता है।
राखी बांधने से पहले भाई के मस्तक पर कुमकुम या रोली का तिलक लगाएं और उस पर अक्षत लगाएं।
कभी भी भद्रा काल या राहुकाल के दौरान भाई की कलाई पर रक्षासूत्र न बांधें। हमेशा शुभ मुहूर्त देखकर ही राखी का त्यौहार मनाएं।

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