Ramayan: इस जगह हुआ था ‘रावण’ और ‘जटायु’ का युद्ध

Edited By Updated: 27 Jul, 2021 04:30 PM

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राम की वनवास यात्रा से जुड़े जिन स्थलों के दर्शन इस बार आपको करवाने जा रहे हैं, इस बार उनमें वह स्थान विशेष रूप से शामिल है जहां सीता माता का हरण करके जा रहे रावण को जटायु ने ललकारा था।

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राम की वनवास यात्रा से जुड़े जिन स्थलों के दर्शन इस बार आपको करवाने जा रहे हैं, इस बार उनमें वह स्थान विशेष रूप से शामिल है जहां सीता माता का हरण करके जा रहे रावण को जटायु ने ललकारा था। ये सभी स्थान महाराष्ट्र में स्थित हैं।

सर्वतीर्थ घोटी, टाकेद, नाशिक
सीताजी का हरण कर ले जा रहे रावण का जटायु से युद्ध हुआ था। श्रीराम ने उनका अग्नि संस्कार किया तथा जलांजलि दी। नासिक से 58 कि.मी. घोटी के पास ताकेद गांव में सर्वतीर्थ वही पवित्र स्थल है। इस स्थल की स्थानीय लोगों में भी काफी मान्यता है जहां भारी सं या में लोग पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।
(ग्रंथ उल्लेख : वा.रा. 3/49/37 से 40 /3/50, 51 पूरे अध्याय 3 /52/1 से 13/3/64/35 से 77/3/65/1 से 9/3/67/9 से 3/69/1, मानस 3/28/4 से 11/3/29/9 से  3/ 32/1)

बालुकेश्वर मंदिर, मालाबार हिल्स, मुंबई
श्रीराम सीता माता की खोज करते हुए मुंबई में समुद्र तट तक आए थे। यहां उन्होंने बालू के शिवलिंग की स्थापना की तथा बाण से मीठे जल का स्रोत बनाया। वहीं आज बालुकेश्वर मंदिर है तथा मीठे जल का स्रोत प्रवाहित हो रहा है। इसे बाण गंगा कहते हैं। माना जाता है कि श्रीराम मु बई से राम दरिया होते हुए पुणे गए थे। राम दरिया राम द्वार का अपभ्रंश है। यहां पहाड़ की दो चोटियां इस प्रकार निकट हैं कि द्वार जैसा लगता है।

निकट ही  शिरूर में  रामलिंग देव स्थानम भी स्थित है। लोक कथा के अनुसार श्रीराम ने लंका अभियान के समय घोड़ नदी के किनारे क्रूर  नामक राक्षस का वध किया था। राक्षस का सिर यहां गिरा था इसलिए यह स्थल सिररूर था जो शिरूर हो गया है। यहां श्रीराम द्वारा स्थापित भगवान शिव का एक बहुत विशाल मंदिर है।
(ग्रंथ उल्लेख : वा.रा. 1/69/1 से 9 तक मानस 3/32/2) —डा. राम अवतार

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