Edited By Niyati Bhandari,Updated: 02 May, 2026 01:00 PM

Jyeshtha Maas Rules & Tips: ज्येष्ठ मास 2026 (2 मई से 29 जून) में भगवान विष्णु और उनकी भार्या लक्ष्मी एवं बजरंगबली की कृपा कैसे पाएं? जानें इस महीने के जरूरी नियम, वर्जित कार्य और बड़ा मंगल का महत्व। भीषण गर्मी में इन गलतियों से बचें।
Jyeshtha Maas Rules & Tips: हिंदू पंचांग के अनुसार, साल का तीसरा और सबसे ऊर्जावान महीना ज्येष्ठ आज से शुरू होने जा रहा है। साल 2026 में इस पवित्र मास का शुभारंभ 2 मई से हो रहा है, जो 29 जून तक चलेगा। शास्त्रों में ज्येष्ठ मास को तप, संयम और सेवा का महीना माना गया है। ज्येष्ठ नक्षत्र और मंगल के स्वामित्व वाला यह महीना न केवल अपनी भीषण गर्मी के लिए जाना जाता है, बल्कि भगवान विष्णु और उनकी भार्या लक्ष्मी एवं बजरंगबली की विशेष कृपा पाने का भी सबसे उत्तम समय है।

शास्त्रों के अनुसार, इस महीने के स्वामी 'मंगल' हैं और ज्येष्ठ नक्षत्र के कारण ही इसका नाम ज्येष्ठ पड़ा है। सूर्य देव जब अपने चरम ताप पर होते हैं, तब ज्येष्ठ मास में अनुशासन और संयम का पालन करना अनिवार्य माना गया है। मान्यता है कि इस दौरान की गई छोटी सी लापरवाही न केवल आपके स्वास्थ्य को बिगाड़ सकती है, बल्कि आर्थिक और मानसिक संकट का कारण भी बन सकती है।
ज्येष्ठ माह के हर मंगलवार को हनुमान जी की विशेष पूजा का महत्व है। ज्येष्ठ माह में भगवान हनुमान जी को श्रेष्ठ व भक्त वत्सल के रूप में पूजा जाता है। भगवान शिव के सब अवतारों में से हनुमान जी सबसे श्रेष्ठ हैं, जो कि कलयुग में प्रत्यक्ष रूप से मौजूद हैं। भगवान शंकर और राम जी से इन्हें अमरता का वर इसी माह के मंगलवार को प्राप्त हुआ था। वैसे भी मंगल अग्नि का प्रतीक हैं और ज्येष्ठ माह में सूर्य का प्रभाव भी बहुत अधिक रहता है। सूर्य के प्रचंड ताप में हनुमान जी और महालक्ष्मी बरसाएंगे कृपा, 60 दिनों तक इन कामों को भूल कर भी न करें। इन कामों से दैवीय शक्तियां हो जाती हैं नाराज-

स्वच्छता न रखना : गदंगी से दूर रहें। घर को स्वच्छ रखें। स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर में मकड़ी के जाले नहीं होने चाहिएं।
अन्न का अनादर करना : अन्न और जल का आदर करें। भोजन करते समय जूठा अन्न नहीं छोड़ना चाहिए। जल का महत्व समझना चाहिए। ज्येष्ठ माह में जल का दान करना अक्षय पुण्य की श्रेणी में आता है।
लोभ : जो लोग दूसरों के धन का लोभ करते हैं, उन्हें लक्ष्मी जी छोड़कर चली जाती हैं।

क्रोध और अहंकार : पारा चढ़ने के साथ स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ सकता है लेकिन वाद-विवाद और कलह से बचना चाहिए अन्यथा घर की सुख-शांति भंग हो सकती है। क्रोध और अहंकार से दूर रहने का हर संभव प्रयत्न करें।
आलस : आलसी व्यक्तियों को भी लक्ष्मी जी अपना आशीर्वाद नहीं देती हैं इसलिए आलस का त्याग करना चाहिए। ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान और ध्यान करने से शरीर और मन दोनों को सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
