Tibet Earthquake: तिब्बत में तड़के महसूस किए गए भूकंप के झटके, डरे सहमे लोग घरों से निकले बाहर

Edited By Updated: 08 May, 2026 08:55 AM

earthquake of magnitude 4 1 strikes tibet earthquake

नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार आज तड़के तिब्बत में भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 4.1 दर्ज की गई है। हालांकि राहत की बात यह है कि तीव्रता कम होने के कारण फिलहाल किसी बड़े जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है।...

Tibet Earthquake : नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार आज तड़के तिब्बत में भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 4.1 दर्ज की गई है। हालांकि राहत की बात यह है कि तीव्रता कम होने के कारण फिलहाल किसी बड़े जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है। भूकंप शुक्रवार (8 मई, 2026) को भारतीय समयानुसार सुबह 3:10 बजे आया। गहराई जमीन से 38 किलोमीटर नीचे थी। वहीं NCS के डेटा के मुताबिक भूकंप का केंद्र 35.385 उत्तरी अक्षांश और 85.112 पूर्वी देशांतर पर स्थित था।

बता दें कि उथले भूकंप आमतौर पर गहरे भूकंपों की तुलना में ज़्यादा खतरनाक होते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि उथले भूकंपों से निकलने वाली भूकंपीय तरंगें सतह तक पहुंचने के लिए कम दूरी तय करती हैं जिसके परिणामस्वरूप ज़मीन ज़्यादा ज़ोर से हिलती है इमारतों को ज़्यादा नुकसान पहुंचता है और ज़्यादा लोगों की जान जाती है। तिब्बती पठार की पहचान टेक्टोनिक प्लेटों के टकराने से होने वाली भूकंपीय गतिविधियों के कारण होती है।

तिब्बत और नेपाल एक मुख्य भूवैज्ञानिक फॉल्ट लाइन पर स्थित हैं जहां भारतीय टेक्टोनिक प्लेट यूरेशियन प्लेट से टकराती है जिसके कारण अक्सर भूकंप आते रहते हैं। यह क्षेत्र टेक्टोनिक उत्थान के कारण भूकंपीय रूप से सक्रिय है यह उत्थान इतना मज़बूत हो सकता है कि हिमालय की चोटियों की ऊंचाई में भी बदलाव ला सकता है।

 

 

तिब्बती पठार की ऊंचाई इतनी ज़्यादा होने का कारण भारतीय और यूरेशियन प्लेटों के टकराने से पपड़ी का मोटा होना है जिससे हिमालय का निर्माण हुआ। पठार के भीतर होने वाली फॉल्टिंग का संबंध स्ट्राइक-स्लिप और सामान्य (normal) प्रक्रियाओं से है। यह पठार पूरब से पश्चिम की ओर फैला हुआ है, जिसका प्रमाण उत्तर-दक्षिण दिशा में फैली हुई ग्रैबेन संरचनाओं, स्ट्राइक-स्लिप फॉल्टिंग और GPS डेटा से मिलता है। उत्तरी क्षेत्र में स्ट्राइक-स्लिप फॉल्टिंग ही मुख्य टेक्टोनिक शैली है जबकि दक्षिणी क्षेत्र में मुख्य टेक्टोनिक प्रक्रिया उत्तर-दक्षिण दिशा में फैली हुई सामान्य (normal) फॉल्ट लाइनों पर पूरब-पश्चिम दिशा में होने वाला विस्तार है।

तिब्बत में आने वाले सबसे बड़े भूकंप—जिनकी तीव्रता 8.0 या उसके आसपास होती है—स्ट्राइक-स्लिप फॉल्ट लाइनों के सहारे ही आते हैं। सामान्य (normal) फॉल्टिंग के कारण आने वाले भूकंपों की तीव्रता कम होती है; 2008 में, पठार भर में 5.9 से 7.1 की तीव्रता वाले 5 नॉर्मल-फॉल्टिंग भूकंप आए। इनमें से एक महिला जिसकी पहचान पायल (26) के रूप में हुई की मंगलवार सुबह इलाज के दौरान मृत्यु हो गई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार को मेडिकल कॉलेज का दौरा किया और प्रभावित महिलाओं के इलाज की जानकारी ली। इस बीच कोटा जिला प्रशासन ने मामले की जांच के लिए विभिन्न समितियों का गठन किया है और उनकी रिपोर्ट का इंतजार है।

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