Edited By Niyati Bhandari,Updated: 27 Oct, 2026 11:15 AM

चीनी शोधकर्त्ताओं ने चेतावनी दी है कि तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी में इस सदी के दौरान जलप्रवाह और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। चीन इस नदी पर 168 अरब अमेरिकी डॉलर की अनुमानित लागत से दुनिया का सबसे बड़ा बांध बना रहा है।
पेइचिंग (एजैंसी) : चीनी शोधकर्त्ताओं ने चेतावनी दी है कि तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी में इस सदी के दौरान जलप्रवाह और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। चीन इस नदी पर 168 अरब अमेरिकी डॉलर की अनुमानित लागत से दुनिया का सबसे बड़ा बांध बना रहा है।
चीनी विज्ञान अकादमी के शोधकर्त्ताओं ने दक्षिण-पूर्वी तिब्बती पठार से प्राप्त पेड़ों के छल्लों की चौड़ाई के कालक्रम का उपयोग करके, 1325 से 2020 तक नदी के बहाव के इतिहास का पुनर्निर्माण किया। उन्होंने पुनर्निर्माण को जलवायु आंकड़ों के साथ मिलाकर एक ऐसा मॉडल तैयार किया, जिससे यह अनुमान लगाया गया कि भविष्य की जलवायु परिस्थितियों में नदियों के बहाव में वृद्धि होगी, और साथ ही बाढ़ जैसी घटनाओं के होने की आशंका भी बढ़ेगी।
‘चाइना साइंस बुलेटिन’ पत्रिका में प्रकाशित एक शोध-पत्र में टीम ने कहा है कि ये परिणाम यारलुंग सांगपो (ब्रह्मपुत्र) नदी में जल-जलवायु संबंधी उतार-चढ़ाव का दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य प्रदान करते हैं, और भविष्य में जल-संसाधन से जुड़े जोखिमों का आकलन करने के लिए एक वैज्ञानिक आधार देते हैं।
दोगुनी दर से गर्म हो रहा तिब्बती पठार
शोधकर्ताओं ने कहा कि जल संसाधन विकास और भंडारण अवसंरचना की योजना बनाते समय, तथा इस क्षेत्र में सीमा-पार जल जोखिमों का आकलन करते समय, भविष्य में होने वाले जल प्रवाह को ध्यान में रखा जाना चाहिए। चीनी शोधकर्ताओं के अनुसार, तिब्बती पठार वैश्विक औसत की तुलना में लगभग दोगुनी दर से गर्म हो रहा है, जिससे वहां की बर्फ की परत और जल-चक्र प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नदी में होने वाले बदलाव न केवल पठार के भीतर के जल-विज्ञान तंत्र को दर्शाते हैं, बल्कि दक्षिण एशिया में सूखे और बाढ़ के स्वरूप को भी प्रभावित करते हैं। हाल के वर्षों में, जलवायु के लगातार गर्म होने के साथ, यारलुंग सांगपो नदी घाटी के जल-विज्ञान संबंधी तंत्र में महत्वपूर्ण बदलाव आ रहे हैं।