Edited By Sarita Thapa,Updated: 25 Jun, 2026 12:27 PM

हिंदू धर्म में पूजा-पाठ ही नहीं, बल्कि खान-पान और रसोई से जुड़े भी कुछ खास नियम बताएं गए है। वैसे तो हर किसी से घर में दो वक्त की ताजी रोटी बनाई जाती है लेकिन हिंदू संस्कृति में कुछ ऐसी तिथियां और विशेष पर्व हैं, जब घर में रोटी नहीं बनाई जाती है।
Roti Niyam : हिंदू धर्म में पूजा-पाठ ही नहीं, बल्कि खान-पान और रसोई से जुड़े भी कुछ खास नियम बताएं गए है। वैसे तो हर किसी से घर में दो वक्त की ताजी रोटी बनाई जाती है लेकिन हिंदू संस्कृति में कुछ ऐसी तिथियां और विशेष पर्व हैं, जब घर में रोटी नहीं बनाई जाती है। मान्यता है कि यदि इन दिनों में घर में रोटी बनाई जाए, तो धन की देवी मां लक्ष्मी और अन्नपूर्णा रुष्ट हो जाती हैं, जिससे घर में दरिद्रता और अशांति का वास होने लगता है। तो आइए जानते हैं कि वे कौन सी तिथियां हैं और इसके पीछे की धार्मिक मान्यताएं क्या हैं।
नागपंचमी
हिंदू धर्म में नागपंचमी का बहुत खास महत्व है। रसोई में इस्तेमाल होने वाले लोहे के तवे को नाग देवता के फन का प्रतिरूप माना जाता है। मान्यता है कि नागपंचमी के दिन तवे को आग पर रखने से नाग देवता रुष्ट हो जाते हैं। इसलिए नाग पंचमी के दिन रोटी बनाने से परहेज किया जाता है।
शरद पूर्णिमा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा के दिन ही माता लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। इस रात को चंद्रमा से अमृत की वर्षा होती है। इस पावन अवसर पर माता लक्ष्मी के स्वागत के लिए घरों में कच्चे भोजन के बजाय खीर और पूरियां बनाई जाती हैं और उसे रातभर चांद की रोशनी में रखा जाता है।

दीपावली
हिंदू धर्म में दीपावली का पर्व बहुत पवित्र और शुभ माना जाता है। इस दिन माता लक्ष्मी की पूरे विधि-विधान के साथ पूजा की जाती है और इतने बड़े उत्सव के दिन रोज की साधारण रोटी बनाने के बजाय माता के भोग के लिए विशेष छप्पन भोग, पूरी, कचौड़ी, और विभिन्न प्रकार की मिठाइयां बनानी चाहिए।
शीतला अष्टमी या बसौड़ा
माता शीतला को शीतलता और आरोग्यता की देवी माना जाता है। उन्हें हमेशा ठंडे और बासी भोजन का भोग लगाया जाता है। यही कारण है कि इस त्योहार के एक दिन पहले ही सारा भोजन बना लिया जाता है और अष्टमी के दिन घर में ताजी रोटी या कोई भी गर्म पकवान नहीं बनता।

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