सांवलिया सेठ के चरणों में चढ़ा अनोखा चांदी का दिल, भक्तों में छाया भावुक माहौल

Edited By Updated: 25 May, 2026 04:12 PM

sanwaliya seth mandir news

क्या कोई भगवान को अपना दिल भेंट कर सकता है। शायद  हां, भक्ति में तो ऐसा होता ही है। लेकिन राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में स्थित प्रसिद्ध श्री सांवलिया सेठ मंदिर में एक भक्त ने इस बात को सचमुच सच कर दिखाया है।

Sanwaliya Seth Mandir news : क्या कोई भगवान को अपना दिल भेंट कर सकता है। शायद  हां, भक्ति में तो ऐसा होता ही है। लेकिन राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में स्थित प्रसिद्ध श्री सांवलिया सेठ मंदिर में एक भक्त ने इस बात को सचमुच सच कर दिखाया है। इतिहास में पहली बार, सांवलिया सेठ के दरबार में एक भक्त ने साक्षात चांदी का दिल और चांदी का नलकूप (ट्यूबवेल) भेंट किया है। इतना ही नहीं जब मंदिर का दानपात्र खोला गया, तो वहां से निकला नोटों का ऐसा पहाड़ जिसे गिनते-गिनते अधिकारियों के पसीने छूट गए। आंकड़ा 25 करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है। तो आइए जानते हैं कि आखिर क्या है इस अनोखे चढ़ावे की कहानी और क्यों सांवलिया सेठ को कहा जाता है कलयुग का सबसे बड़ा बिजनेस पार्टनर।

अनोखी भेंट और नोटों का पहाड़
सबसे पहले बात करते हैं उस अनोखी भेंट की जिसने सोशल मीडिया से लेकर मंदिर के गलियारों तक सबको हैरान कर दिया है। सांवलिया सेठ के दरबार में देश-विदेश से सोने-चांदी के आभूषण आना तो आम बात है। लेकिन इस बार एक श्रद्धालु ने अपनी मन्नत पूरी होने पर भगवान को चांदी का बना हुआ एक खूबसूरत दिल और चांदी का छोटा नलकूप समर्पित किया है।

जानकारी के अनुसार, सांवलिया निवासी उमेश तिवारी के पिता बालमुकुंद तिवारी की करीब तीन साल पहले तबीयत अचानक खराब हो गई थी। जांच में उन्हें हार्ट अटैक की समस्या बताई गई और डॉक्टरों ने बाईपास सर्जरी की सलाह दी। परिवार उन्हें उपचार के लिए अहमदाबाद लेकर गया। इस कठिन समय में परिवार ने सांवलिया सेठ से प्रार्थना की कि यदि ऑपरेशन सफल हो गया तो वे भगवान को चांदी का हृदय भेंट करेंगे। परिवार का कहना है कि भगवान सांवलिया सेठ की कृपा से सर्जरी सफल रही और बालमुकुंद तिवारी पूरी तरह स्वस्थ हो गए। मनोकामना पूरी होने के बाद परिवार ने करीब 197 ग्राम चांदी से हृदय बनवाया और शोभायात्रा के साथ मंदिर पहुंचकर उसे भगवान को अर्पित किया। श्रद्धालु परिवार ने चांदी के हार्ट के साथ एक चांदी का नलकूप भी भेंट किया।

सांवलिया जी के दरबार के लिए ऐसी अनोखी भेंटें नई नहीं हैं। इससे पहले भी भक्त यहां चांदी की जेसीबी, चांदी का ट्रैक्टर, बाइक,चांदी की किताब और यहां तक कि चांदी का पूरा पेट्रोल पंप भी चढ़ा चुके हैं और बात सिर्फ अनोखी भेंटों की ही नहीं है। इस बार सांवलिया सेठ का खजाना भी सारे रिकॉर्ड तोड़ रहा है। कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को जब मंदिर का मासिक भंडार खोला गया तो नोटों की गड्डियां देखकर सबकी आंखें फटी की फटी रह गईं। प्रशासनिक अधिकारियों की देखरेख में चार चरणों की गिनती पूरी हो चुकी है और अब तक 25 करोड़ रुपये से ज़्यादा का कैश सामने आ चुका है। नोटों के साथ-साथ भारी मात्रा में सोना और चांदी भी भंडार से निकला है।

सांवलिया सेठ का महत्व - क्यों आते हैं यहां बड़े-बड़े व्यापारी?
भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित इस धाम के बारे में मान्यता है कि यहां मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है। राजस्थान ही नहीं बल्कि मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र से लाखों श्रद्धालु हर महीने यहां शीश नवाने आते हैं। सबसे खास बात ये है कि देश के बड़े-बड़े व्यापारी, बिजनेसमैन और किसान सांवलिया सेठ को अपना 'बिजनेस पार्टनर' मानते हैं! लोग अपने नए व्यापार या खेती की शुरुआत करने से पहले यहां आते हैं और अपने मुनाफे का एक निश्चित हिस्सा भगवान के नाम कर देते हैं। यही वजह है कि भक्त इन्हें प्यार से 'सांवलिया सेठ' यानी धन और सुख-समृद्धि देने वाला राजा कहते हैं।

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