Edited By Sarita Thapa,Updated: 17 May, 2026 12:36 PM
कई बार हम अपने जीवन से तंग आकर खुद को कौसते रहते हैं। बस एक ही बात सोचते रहते हैं कि हमें यह नहीं मिला वो नहीं मिला। लेकिन जीवन में सफल बनने के लिए अपने आप पर भरोसा रखना और मेहनत करना बहुत जरूरी होता है।
Smile please : कई बार हम अपने जीवन से तंग आकर खुद को कौसते रहते हैं। बस एक ही बात सोचते रहते हैं कि हमें यह नहीं मिला वो नहीं मिला। लेकिन जीवन में सफल बनने के लिए अपने आप पर भरोसा रखना और मेहनत करना बहुत जरूरी होता है। जब किसी काम को करते हुए बार-बार निराशा हाथ लगती है, तो मन टूट जाता है और मेहनत करने का दिल नहीं करता। लेकिन हार मानने की बजाय मेहनत करते रहना बहुत जरूरी है, क्योंकि कभी न कभी सफलता जरूर हाथ लगती है। अगर जीवन में सकारात्मक सोच की शुरुआत करना चाहते हैं, तो कुछ अनमोल और शक्तिशाली विचारों को अपनाना बहुत जरूरी है, तो आइए जानते हैं कुछ महान विद्वानों के अनमोल विचारों के बारे में-
अगर आप मुझसे पूछें कि दीर्घ आयु का क्या राज है तो मैं कहूंगा कि चिंता और तनाव से बचें। -जॉर्ज बन्र्स
दौलत की संतति - अहंकार, दिखावा, आडम्बर, अभिमान, निर्दयता। -मार्क ट्वेन
जब बिल्कुल अंधकार होता है, तब इंसान सितारे देख पाता है। -राल्फ वाल्डो इमर्सन
उस ज्ञान का कोई लाभ नहीं जिसे आप काम में नहीं लेते। -एंटन चेखोव
दूरदर्शिता - जो दूसरे नहीं देख पाएं उसे देख पाने की कला है। -जोनाथन स्विफ्ट
जब आप किसी चीज में यकीन करें तो पूरी तरह करें, नि:स्संदेह और निर्विवाद रूप से। -वाल्ट डिज्नी
असफलता का मौसम, सफलता के बीज बोने के लिए सर्वश्रेष्ठ समय होता है। -परमहंस योगानंद
सफल व्यक्ति होने का प्रयास न करें, अपितु गरिमामय व्यक्ति बनने का प्रयास करें। -अल्बर्ट आइंस्टीन
हमारा मस्तिष्क, हमारा हृदय ही हमारा मन्दिर है और दयालुता जीवन-दर्शन है। -दलाई लामा
स्वाभिमानी होना अच्छा है परन्तु स्वाभिमान से विनम्रता श्रेष्ठ है। —शेक्सपियर
अनुभव बताता है कि आपातकाल में दृढ़ निश्चय ही पूरी सहायता करता है। —शेक्सपियर
निराशा स भव को अस भव बना देती है। —प्रेमचंद
निरुत्साह होने से भाग्य भी नष्ट हो जाता है। —चाणक्य
महान कार्यों के लिए पहली जरूरत है आत्मविश्वास। —सैमुएल जॉन्सन
जिसे पराजित होने का भय है, उसकी हार निश्चित है। —नेपोलियन
लगन के बिना किसी में भी महान प्रतिभा उत्पन्न नहीं हो सकती। —अरस्तु
जीवन कर्म का ही दूसरा नाम है। वह जो कभी कर्म नहीं करता, उसका अस्तित्व तो है किन्तु वह जीवित नहीं। —हिलार्ड

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