Sri Sri Ravi Shankar: 45 वर्षों की मानव सेवा का वैश्विक सम्मान, न्यू जर्सी विधानमंडल और स्थानीय निकायों ने गुरुदेव श्री श्री रविशंकर को किया सम्मानित

Edited By Updated: 28 Sep, 2026 01:07 PM

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Sri Sri Ravi Shankar: गुरुदेव श्री श्री रविशंकर की 45 वर्षों की मानवीय सेवा और शांति प्रयासों को न्यू जर्सी राज्य विधानमंडल, एडिसन और फ्रैंकलिन टाउनशिप ने सम्मानित किया। जानें न्यू यॉर्क संबोधन के मुख्य बिंदु।

Sri Sri Ravi Shankar: पिछले साढ़े चार दशकों (45 वर्षों) से विविध समुदायों और संस्कृतियों के बीच शांति, मानवीय मूल्यों और आत्मीय जुड़ाव को सुदृढ़ कर रहे गुरुदेव श्री श्री रविशंकर की मानवसेवा यात्रा में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। न्यू जर्सी की अपनी हालिया यात्रा के दौरान उनकी साढ़े चार दशक लंबी इस शांति-निर्माण और जन-कल्याणकारी यात्रा को न्यू जर्सी राज्य विधानमंडल तथा एडिसन और फ्रैंकलिन टाउनशिप द्वारा औपचारिक रूप से सम्मानित किया गया।

उत्तरी अमेरिका के 54 शहरों में 'श्री श्री रविशंकर दिवस'
गुरुदेव को मिले ये नए सम्मान उत्तरी अमेरिका में उन्हें प्राप्त नागरिक सम्मानों की एक सुदीर्घ श्रृंखला की अगली कड़ी हैं। अधिक सुदृढ़, संवेदनशील और शांतिपूर्ण समाजों के निर्माण में उनके उल्लेखनीय योगदान की सार्वजनिक स्वीकृति के रूप में अमेरिका और कनाडा के 54 शहरों ने उनके सम्मान में ‘श्री श्री रविशंकर दिवस’ घोषित किया है।

"एकाकीपन लोगों की अनुपस्थिति नहीं, आत्मीयता का अभाव है"

23 सितंबर को न्यू यॉर्क स्थित ऐतिहासिक सेंट जॉन द डिवाइन कैथेड्रल के खचाखच भरे सभागार को संबोधित करते हुए गुरुदेव ने मानवीय संवेदनाओं और आत्मीयता पर गहरा विचार रखा। उन्होंने कहा: "एकाकीपन लोगों की अनुपस्थिति नहीं है, यह उस आत्मीय उपस्थिति के अनुभव का अभाव है, जिसे हृदय महसूस कर सके।"

विपरीत परिस्थितियों में भीतर से केंद्रित रहना ही सच्ची शक्ति
आंतरिक सामर्थ्य और संतुलन पर बात करते हुए गुरुदेव ने रेखांकित किया कि वास्तविक शक्ति बाहर से नहीं, बल्कि व्यक्ति के भीतर से प्रस्फुटित होती है। परिस्थितियां चाहे कितनी भी विषम या कठिन क्यों न हों, अपने भीतर केंद्रित और संतुलित बने रहने की क्षमता ही सच्ची शक्ति की पहचान है।

व्यक्तिगत कल्याण से ही संभव है विश्व शांति
न्यू यॉर्क और न्यू जर्सी के सार्वजनिक संवादों में गुरुदेव ने इस बात पर विशेष बल दिया कि आंतरिक कल्याण को सामूहिक कल्याण से अलग नहीं किया जा सकता:
शांत व्यक्ति: एक संतुलित और शांत व्यक्ति ही शांत परिवार की नींव रखता है।
शांत परिवार: शांत और संवेदनशील परिवारों से ही शांतिपूर्ण समुदायों का निर्माण होता है।
शांतिपूर्ण विश्व: अंततः यही आंतरिक शांति और मानवीय जुड़ाव मिलकर एक शांतिपूर्ण और करुणामय विश्व की आधार भूमि तैयार करते हैं।

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