Why is the Gogamedi Mela Celebrated on Goga Navami : गोगा नवमी पर क्यों लगता है गोगामेड़ी का विशाल मेला, जानें इससे जुड़ी अनोखी परंपरा

Edited By Updated: 04 Sep, 2026 05:43 PM

why is the gogamedi mela celebrated on goga navami

भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को पूरे उत्तर भारत में गोगा नवमी का पर्व बहुत उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया  जाता है। यह दिन राजस्थान के प्रसिद्ध लोकदेवता जाहरवीर गोगाजी को समर्पित है।

Why is the Gogamedi Mela Celebrated on Goga Navami : भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को पूरे उत्तर भारत में गोगा नवमी का पर्व बहुत उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया  जाता है। यह दिन राजस्थान के प्रसिद्ध लोकदेवता जाहरवीर गोगाजी को समर्पित है। इस अवसर पर राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के भादरा तहसील में स्थित गोगामेड़ी में एक विशाल मेले का आयोजन होता है। यह मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपरा, आस्था की एक जीवंत मिसाल है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर इसी स्थान पर गोगा नवमी पर इतना बड़ा मेला क्यों लगता है और इससे जुड़ी अनोखी परंपराएं क्या हैं? तो आइए जानते हैं इस परंपरा के बारे में- 

Why is the Gogamedi Mela Celebrated on Goga Navami

गोगामेड़ी में क्यों लगता है यह विशाल मेला?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गोगामेड़ी वही पवित्र स्थान है, जहां गोगाजी महाराज  ने अपने वचनों का पालन करते हुए जीवित भू-समाधि ली थी। जिस दिन उन्होनें समाधि ली थी, वह भाद्रपद कृष्ण नवमी का ही दिन था। इसलिए इस दिन को गोगा नवमी के  रूप में मानाया जाता है और उनकी याद व सम्मान में यहाँ विशाल मेले का आयोजन होता है। गोगाजी को नागों के देवता के रूप में पूजा जाता है। यह मान्यता है कि जो श्रद्धालु गोगामेड़ी आकर माथा टेकते हैं, उन्हें और उनके परिवार को कभी सर्पदंश का भय नहीं रहता। किसान और ग्रामीण अपने पशुओं की अच्छी सेहत और जहरीले जीवों से रक्षा के लिए यहां मन्नत मांगते हैं।

Why is the Gogamedi Mela Celebrated on Goga Navami

गोगामेड़ी मेले से जुड़ी अनोखी परंपराएं

गोगामेड़ी की सबसे अद्भुत बात यह है कि यहां हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग एक साथ पूजा-अर्चना करते हैं।

गोगामेड़ी मंदिर का मुख्य द्वार मकबरेनुमा शैली में बना हुआ है और उस पर 'बिस्मिल्लाह' लिखा है।

मंदिर में हिंदू पुजारियों के साथ-साथ मुस्लिम पुजारी भी सेवा करते हैं।

हिंदू उन्हें 'श्री गोगाजी' के रूप में पूजते हैं, तो मुस्लिम श्रद्धालु उन्हें जाहर पीर मानकर अपनी श्रद्धा निवेदित करते हैं।

गोगामेड़ी की पवित्र मिट्टी का महत्व
मेले में आने वाले भक्त मंदिर परिसर के पास बनी 'मेड़ी' की मिट्टी को अपने माथे पर लगाते हैं और इसे अपने साथ घर ले जाते हैं। मान्यता है कि इस मिट्टी को घर में रखने या खेत में छिड़कने से जहरीले जीवों का प्रवेश नहीं होता और फसल अच्छी होती है। धार्मिक आयोजन के साथ-साथ यहां एक बहुत बड़ा व्यापारिक पशु मेला भी आयोजित होता है। मेले के दौरान पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से व्यापारी आते हैं, जहाँ हरियाणवी नस्ल की गायों, ऊंटों और नस्ली घोड़ों की बड़े पैमाने पर खरीद-बिक्री होती है।

Why is the Gogamedi Mela Celebrated on Goga Navami

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!