Updated: 15 Jan, 2026 04:02 PM
फिल्म: बिहू अटैक (Bihu Attack)
कलाकार: देव मेनारियाDev Menaria, डेज़ी शाह Daisy Shah, अरबाज खान Arbaaz Khan, राहुल देवRahul Dev, रज़ा मुराद Raza Murad, युक्ति कपूरYukti Kapoor, एमी मिसोबाAmy Misoba, हितेन तेजवानीHiten Tejwani, मीर सरवरMir Sarwar
निर्देशक: सुज़ाद इक़बाल खानSuzad Iqbal Khan
रेटिंग: 3 स्टार
Bihu attack: असम के लोकपर्व बिहू की पृष्ठभूमि में बनी फिल्म ‘बिहू अटैक’ एक संवेदनशील और गंभीर विषय को उठाती है। आतंकवाद, राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक एकता जैसे मुद्दों को यह फिल्म बिना ज्यादा शोर-शराबे के सामने रखती है। बड़े बजट की चकाचौंध से दूर, फिल्म अपनी कहानी और संदेश के दम पर आगे बढ़ती है।
कहानी
कहानी केंद्रित है राज कुंवर (देव मेनारिया) पर, जो एक ईमानदार और अनुशासित कोर्ट मार्शल अधिकारी है। राज मानता है कि बंदूक से ज्यादा ताकत शिक्षा और संवाद में होती है। पत्नी के निधन के बाद वह अपनी छोटी बेटी के साथ सादा जीवन जी रहा होता है।
कहानी तब गंभीर मोड़ लेती है जब बिहू महोत्सव के दौरान रक्षा मंत्री के दौरे के समय एक बड़े आतंकी हमले की साजिश का पता चलता है। पड़ोसी देश से जुड़े आतंकी संगठन स्थानीय मदद से इस हमले को अंजाम देने की योजना बनाते हैं। हालात की गंभीरता को समझते हुए राज कुंवर, अपने पूर्व सीनियर केडी सर की मदद से इस खतरे को रोकने में जुट जाता है। फिल्म का क्लाइमेक्स तनाव और भावनात्मक जुड़ाव दोनों पैदा करता है।
अभिनय
देव मेनारिया ने राज कुंवर के किरदार को मजबूती और सादगी के साथ निभाया है। एक सख्त अधिकारी और एक संवेदनशील पिता—दोनों पहलुओं को वे संतुलित ढंग से पेश करते हैं। डेज़ी शाह सीमित रोल में ठीक प्रभाव छोड़ती हैं। अरबाज खान आईबी चीफ के किरदार में गंभीर और संयमित नजर आते हैं। राहुल देव, रज़ा मुराद, युक्ति कपूर, मीर सरवर और हितेन तेजवानी जैसे कलाकार फिल्म को मजबूत सपोर्ट देते हैं।
निर्देशन
सुज़ाद इक़बाल खान का निर्देशन सधा हुआ है। उन्होंने विषय की नाजुकता को समझते हुए फिल्म को रियलिस्टिक टोन में रखा है। कुछ जगहों पर फिल्म डॉक्यूमेंट्री जैसी फील देती है, जो इसके मैसेज को और असरदार बनाती है। हालांकि एडिटिंग और कुछ दृश्यों को और कसा जा सकता था, लेकिन निर्देशक का कंट्रोल पूरी फिल्म में बना रहता है।
रिव्यू
‘बिहू अटैक’ उन दर्शकों के लिए है जो देशभक्ति को भावनात्मक नारेबाजी के बजाय एक गंभीर सोच के रूप में देखना पसंद करते हैं। यह फिल्म केवल एक थ्रिलर नहीं, बल्कि उग्रवाद के खिलाफ शिक्षा, संवाद और सामाजिक समावेशन की अहमियत को भी रेखांकित करती है।
कमियों के बावजूद, अपने ईमानदार प्रयास और सामाजिक संदेश के कारण ‘बिहू अटैक’ एक बार देखी जा सकने वाली फिल्म है—खासतौर पर उन लोगों के लिए जो उत्तर-पूर्व भारत की वास्तविकताओं और उसकी चुनौतियों को समझना चाहते हैं।