Edited By Tanuja,Updated: 01 Mar, 2026 07:21 PM

ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की अमेरिका-इजरायल हमलों में कथित मौत के बाद पाकिस्तान के कई शहरों में उग्र विरोध प्रदर्शन भड़क उठे। कराची में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के बाहर हिंसक झड़पों में 10 लोगों की मौत हुई, जबकि इस्लामाबाद और लाहौर में भी...
International Desk: अमेरिका-इजरायल हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ( Ali Khamenei) की मौत के बाद पाकिस्तान का ईरान के प्रति प्रेम खुलकर सामने आ गया है। अली खामेनेई की मौत के खिलाफ देश के कई शहरों में उग्र प्रदर्शन भड़क उठे। Karachi में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के बाहर हिंसक झड़पें हुईं, जबकि Islamabad में पुलिस ने धारा 144 लागू कर कड़ा बल प्रयोग किया।पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर Karachi में रविवार को हालात बेकाबू हो गए। हजारों प्रदर्शनकारी अमेरिकी वाणिज्य दूतावास की ओर बढ़े और गेट तोड़कर अंदर घुसने की कोशिश की। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प हुई। सिविल अस्पताल के अनुसार 10 शव लाए गए, कई पर गोली के निशान थे।लगभग 30 घायल ट्रॉमा सेंटर में भर्ती हैं, जिनमें 4 पुलिसकर्मी शामिल हैं।सिंध के गृह मंत्री जिया उल हसन लंजार ने तत्काल रिपोर्ट मांगी और न्यायिक जांच के आदेश दिए। उन्होंने साफ कहा “कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी।”अमेरिकी दूतावास के बाहर सुरक्षा कई गुना बढ़ा दी गई है।
इस्लामाबाद में रेड अलर्ट
राजधानी Islamabad में हालात बिगड़ते देख प्रशासन ने धारा 144 लागू कर दी। रेड ज़ोन को सील कर दिया गया और विदेशी दूतावासों के आसपास अतिरिक्त बल तैनात किए गए। पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया।कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। तहरीक-ए-जाफरिया पाकिस्तान ने अमेरिकी दूतावास घेराव का आह्वान किया था
लाहौर और अन्य शहरों में विरोध
Lahore में प्रेस क्लब के बाहर बड़े पैमाने पर रैलियां हुईं। हजारों महिलाएं भी सड़कों पर उतरीं, जो इस विरोध को और व्यापक बनाता है।इसके अलावा गिलगित-बाल्टिस्तान और स्कर्दू में भी प्रदर्शन हुए।कुछ जगहों पर संयुक्त राष्ट्र से जुड़े कार्यालयों के बाहर तोड़फोड़ की खबरें हैं। इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास ने अपने नागरिकों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है और मिशनों की सुरक्षा बढ़ाई है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि अमेरिका-इजरायल की कार्रवाई “पूरे मुस्लिम विश्व के खिलाफ साजिश” है। धार्मिक और राजनीतिक संगठनों ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। पूरे पाकिस्तान में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।