ईरान में 'मोजतबा' युग का आगाज! पिता की मौत के बाद बेटे ने संभाली कमान, जानें क्या बदलेगी खाड़ी देशों की राजनीति?

Edited By Updated: 01 Mar, 2026 09:49 AM

iran leadership now falls to its son who took over after his father s death

मध्य-पूर्व (Middle-East) के सबसे शक्तिशाली देशों में से एक ईरान में एक नए अध्याय की शुरुआत हो गई है। 28 फरवरी को तेहरान में हुए भीषण हवाई हमले में अली खामेनेई (86) की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को देश का नया 'सुप्रीम लीडर' (सर्वोच्च नेता)...

Mojtaba Khamenei New Iran Supreme Leader : मध्य-पूर्व (Middle-East) के सबसे शक्तिशाली देशों में से एक ईरान में एक नए अध्याय की शुरुआत हो गई है। 28 फरवरी को तेहरान में हुए भीषण हवाई हमले में अली खामेनेई (86) की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को देश का नया 'सुप्रीम लीडर' (सर्वोच्च नेता) चुन लिया गया है। ईरान की सरकारी मीडिया ने इस ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन की पुष्टि कर दी है।

हमले की भयावहता और शोक का माहौल

शनिवार सुबह तेहरान स्थित सुप्रीम लीडर के दफ्तर को निशाना बनाकर किए गए मिसाइल हमले में अली खामेनेई की जान चली गई। सरकार ने इसे सीधे तौर पर रणनीतिक ठिकानों पर किया गया हमला करार दिया है।ईरान सरकार ने देश में 40 दिन के शोक और एक हफ्ते की सार्वजनिक छुट्टी का ऐलान किया है। तेहरान समेत सभी बड़े शहरों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं और देश को हाई-अलर्ट पर रखा गया है।

कौन हैं मोजतबा खामेनेई? 

55 वर्षीय मोजतबा खामेनेई अब तक पर्दे के पीछे रहकर सत्ता की डोर संभालते रहे हैं लेकिन अब वे दुनिया के सामने ईरान के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति के रूप में उभरे हैं। इनका जन्म 1969 में ईरान के मशहद शहर में हुआ था। इन्होंने अपनी शिक्षा धार्मिक और सैन्य माहौल में पूरी की। ईरान-इराक युद्ध के अंतिम दौर में इन्होंने 'रिवोल्यूशनरी गार्ड' (IRGC) में सक्रिय भूमिका निभाई थी। मोजतबा को अपने पिता का सबसे भरोसेमंद सलाहकार माना जाता था। वे लंबे समय से देश के बड़े और कड़े फैसलों में निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं।

विवादों और चुनौतियों के बीच ताजपोशी

मोजतबा खामेनेई का सर्वोच्च नेता बनना ईरान की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे रहा है:

  1. वंशवाद पर सवाल: 1979 की ईरानी क्रांति का मुख्य आधार राजशाही और वंशवाद का विरोध था। ऐसे में पिता के बाद बेटे को कमान मिलने पर कुछ हलकों में विरोध के सुर उठ रहे हैं।

  2. सख्त छवि: साल 2009 के विरोध प्रदर्शनों को कुचलने में मोजतबा का नाम प्रमुखता से उछला था जिससे उनकी छवि एक बेहद सख्त नेता की है।

  3. सेना का समर्थन: मोजतबा को ईरान की सेना और अर्धसैनिक बलों का अटूट समर्थन हासिल है जो इस युद्ध जैसे माहौल में उनकी सबसे बड़ी ताकत है।

क्या होगा भविष्य?

इजरायल और अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच मोजतबा की ताजपोशी यह संकेत देती है कि ईरान अपनी नीतियों में और भी अधिक आक्रामक हो सकता है। दुनिया भर की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि जूनियर खामेनेई अपने पिता के अधूरे मिशन और उनकी मौत के बदले को किस अंजाम तक ले जाते हैं।

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