Review:आर्थिक संकट के दौर की अनकही कहानी को दमदार अंदाज में पेश करती है 'गवर्नर: द साइलेंट सेवियर'

Edited By Updated: 12 Jun, 2026 10:45 AM

manoj bajpayee governor movie review in hindi

यहां पढें कैसी है फिल्म गवर्नर: द साइलेंट सेवियर

फिल्म: गवर्नर (Governor)
कलाकार: मनोज बाजपेयी (Manoj Bajpayee) , अदा शर्मा (Adah Sharma) , मधु (Madhoo), नौशाद मोहम्मद कुंजू (Naushad Mohammed Kunju), परितोष संद (Paritosh Sand) और कृषा कुरुप (Krisha Kurup)
निर्देशक: चिन्मय डी. मांडलेकर (Chinmay D. Mandlekar)
रेटिंग: 3*


Governor: बॉलीवुड एक्टर मनोज बाजपेयी अपनी नई फिल्म 'गवर्नर: द साइलेंट सेवियर' के साथ सिनेमाघरों में हाजिर हो चुके हैं। एक्टर की फिल्मों का चुनाव हमेशा कुछ अलग होता है। इस बार मनोज बाजपेयी आईएएस अधिकारी ए. रामानन की भूमिका में नजर आ रहे हैं। फिल्म का निर्देशन चिन्मय डी. मांडलेकर ने किया है। आईए जानते हैं कैसी हैमनोज बाजपेयी की फिल्म 'गवर्नर: द साइलेंट सेवियर' ।

कहानी
फिल्म की कहानी आईएएस अधिकारी ए. रामानन (मनोज बाजपेयी) के इर्द-गिर्द घूमती है, जिन्हें देश के सबसे कठिन आर्थिक दौर में आरबीआई का गवर्नर बनाया जाता है। यह किरदार पूर्व आरबीआई गवर्नर एस. वेंकटरमणन से प्रेरित माना गया है। फिल्म 1990 के उस दौर में ले जाती है, जब देश गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा था और विदेशी मुद्रा भंडार लगभग खत्म होने की कगार पर था।देश आर्थिक रूप से संकट में है, सरकार पर दबाव बढ़ रहा है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की स्थिति कमजोर नजर आ रही है।  ऐसे समय में रामानन अपनी टीम के साथ मिलकर ऐसे फैसले लेते हैं जो देश को संभावित आर्थिक पतन से बचाने की दिशा में काम करते हैं। 

अभिनय
मनोज बाजपेयी एक बार फिर साबित करते हैं कि गंभीर और जटिल किरदारों को जीवंत बनाने में उनका कोई मुकाबला नहीं है। उन्होंने रामानन के किरदार में संतुलन, दृढ़ता और संवेदनशीलता को बेहद प्रभावी तरीके से पेश किया है। 

अदा शर्मा पत्रकार की भूमिका में सीमित स्क्रीन टाइम के बावजूद प्रभाव छोड़ती हैं। मधु शर्मा ने पत्नी के किरदार में सहज और भावनात्मक अभिनय किया है, जो कहानी को मानवीय स्पर्श देता है। नौशाद मोहम्मद कुंजू डिप्टी गवर्नर के रूप में प्रभावशाली नजर आते हैं, जबकि परितोष सांड ने भी अपनी भूमिका को मजबूती से निभाया है। सहायक कलाकारों का प्रदर्शन फिल्म को विश्वसनीयता प्रदान करता है।



निर्देशन
निर्देशक चिन्मय डी. मांडलेकर ने एक कठिन और तकनीकी विषय को रोचक बनाने की सराहनीय कोशिश की है। उन्होंने आर्थिक फैसलों और राजनीतिक परिस्थितियों को सस्पेंस तथा ड्रामे के साथ प्रस्तुत किया है, जिससे कहानी में लगातार गंभीरता बनी रहती है।

हालांकि, कुछ दृश्य जरूरत से ज्यादा संवादप्रधान लगते हैं, जिसके कारण फिल्म की रफ्तार प्रभावित होती है। इसके बावजूद कई दृश्य लंबे समय तक याद रहते हैं। खासकर वह दृश्य, जिसमें रामानन किसी महंगे पेन के बजाय साधारण दो रुपये के पेन से देश के भविष्य से जुड़े दस्तावेज पर हस्ताक्षर करते हैं, बिना किसी बड़े संवाद के उनके व्यक्तित्व और सोच को प्रभावी ढंग से सामने लाता है।

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