ना जाने कौन आ गया रिव्यू: प्यार और रिश्तों की सरल लेकिन असरदार कहानी

Edited By Updated: 05 Mar, 2026 03:38 PM

na jaane kaun aa gaya movie review in hindi

यहां पढ़ें कैसी है फिल्म ना जाने कौन आ गया

रिव्यू : ना जाने कौन आ गया (Na jaane kaun aa gaya)
कलाकार: जतिन सरना (Jatin Sarna), मधुरिमा रॉय (Madhurima Roy), प्रणय पचौरी (Pranay Pachauri)
निर्देशक: विकास अरोड़ा (Vikas Arora)
रेटिंग: 3 स्टार

Na jaane kaun aa gaya: फिल्म ‘ना जाने कौन आ गया’ पहली नजर में एक साधारण लव स्टोरी लग सकती है, लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, यह रिश्तों की जटिलता और भावनाओं की गहराई को बेहद संवेदनशील तरीके से सामने लाती है। फिल्म यह दिखाने की कोशिश करती है कि प्यार सिर्फ साथ रहने का वादा नहीं, बल्कि एक-दूसरे को समझने, समय देने और स्वीकार करने की प्रक्रिया भी है।

कहानी
कहानी की शुरुआत जतिन सरना और मधुरिमा रॉय के रिश्ते से होती है। दोनों के बीच की केमिस्ट्री सहज और विश्वसनीय लगती है। उनके रिश्ते में प्यार है, लेकिन साथ ही कुछ अनकहे सवाल और दूरियां भी हैं, जो कहानी को आगे बढ़ाती हैं।

फिल्म में असली मोड़ तब आता है जब प्रणय पचौरी का किरदार कहानी में प्रवेश करता है। इसके बाद कहानी एक दिलचस्प लव ट्रायंगल में बदल जाती है। यहां से फिल्म सिर्फ रोमांस नहीं दिखाती, बल्कि रिश्तों में पैदा होने वाली असुरक्षा, ईगो, उलझन और भावनात्मक संघर्ष को भी सामने लाती है। फिल्म यह एहसास दिलाती है कि प्यार जताना आसान है, लेकिन उसे निभाना उतना ही मुश्किल।

अभिनय
जतिन सरना ने अपने किरदार को बेहद ईमानदारी के साथ निभाया है। उनके अभिनय में भावनाओं की सच्चाई दिखाई देती है। कई दृश्यों में उनके चेहरे के भाव और संवाद अदायगी दर्शकों को कहानी से जोड़ते हैं।

प्रणय पचौरी ने भी अपने किरदार को आत्मविश्वास के साथ निभाया है। उनका रोल कहानी में नया आयाम जोड़ता है और कई दृश्यों में ड्रामा को प्रभावी बनाता है।

मधुरिमा रॉय ने एक ऐसे किरदार को निभाया है जो दिल और दिमाग के बीच उलझा हुआ है। उन्होंने अपने अभिनय से उस भावनात्मक द्वंद्व को अच्छी तरह पर्दे पर उतारा है।

निर्देशन और संगीत
निर्देशक विकास अरोड़ा ने मॉडर्न रिश्तों को एक संवेदनशील नजरिए से दिखाने की कोशिश की है। उन्होंने कहानी को ज्यादा जटिल बनाए बिना भावनात्मक रूप से प्रभावी बनाए रखा है।

फिल्म के संवाद कई जगह असर छोड़ते हैं और दर्शकों को सोचने पर मजबूर करते हैं। संगीत भी कहानी के मूड के साथ मेल खाता है। टाइटल ट्रैक ‘ना जाने कौन आ गया’ मधुर है और फिल्म की भावनात्मक धारा को मजबूत करता है।

कुल मिलाकर
‘ना जाने कौन आ गया’ एक ऐसी लव स्टोरी है जो रिश्तों की सच्चाई और भावनाओं की उलझनों को सरल लेकिन प्रभावी ढंग से दिखाती है। यह फिल्म बड़े ट्विस्ट या भव्यता पर नहीं, बल्कि अपने सादे लेकिन दिल छू लेने वाले अंदाज़ और कलाकारों के मजबूत अभिनय पर टिकी है।

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