Updated: 15 May, 2026 12:33 PM
फिल्मः पति पत्नी और वो दो (Pati Patni Aur Woh Do)
डायरेक्टरः मुदस्सर अज़ीज (Mudassar Aziz)
स्टार कास्टः आयुष्मान खुराना (Ayushmann Khurrana), वामिका गब्बी (Wamiqa Gabbi), सारा अली खान (Sara Ali Khan), रकुल प्रीत सिंह (Rakul Preet Singh), तिग्मांशु धूलिया (Tigmanshu Dhulia)
रेटिंग: 4 / 5 स्टार
Pati Patni Aur Woh Do: आजकल जहां ज्यादातर कॉमेडी फिल्में सिर्फ शोर, बड़े-बड़े गग्स और पुराने फॉर्मूले पर टिकती नजर आती हैं, वहीं पति, पत्नी और वो दो अपनी अलग पहचान बनाती है। मुदस्सर अज़ीज़ द्वारा लिखित, निर्देशित और सह-लिखित यह फिल्म सिर्फ हंसाने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि रिश्तों की उलझनों, गलतफहमियों और मजेदार हालातों को नए अंदाज में पेश करती है। जहां दूसरी फिल्में आसान रास्ता चुनती हैं, वहीं यह फिल्म हल्के-फुल्के मनोरंजन के साथ फ्रेश कहानी और लगातार ट्विस्ट्स के दम पर दर्शकों को शुरुआत से अंत तक बांधे रखती है। ऐसे में चलिए आपको बताते हैं आयुष्मान खुराना, वामिका गब्बी, सारा अली खान, रकुल प्रीत सिंह और तिग्मांशु धूलिया स्टारर इस फिल्म का रिव्यू और क्यों यह देखने लायक है।
कहानी
फिल्म की बुनियाद एक पुरानी कहावत पर टिकी है एक झूठ को छुपाने के लिए सौ झूठ बोलने पड़ते हैं। कहानी है प्रजापति पांडे (आयुष्मान खुराना) की, जो एक ईमानदार फॉरेस्ट ऑफिसर है और अपनी पत्रकार पत्नी अपर्णा (वामिका गब्बी) के साथ सुकून भरी लाइफ जी रहा है। ट्विस्ट तब आता है जब प्रजापति अपनी कॉलेज जूनियर चंचल (सारा अली खान) की मदद करने के चक्कर में उसका 'नकली बॉयफ्रेंड' बनने का नाटक करता है। मकसद है चंचल को उसके असली प्रेमी से मिलवाना और बाहुबली नेता गजराज तिवारी (तिग्मांशु धूलिया) के कहर से बचाना। यहीं से शुरू होता है कन्फ्यूजन, पुलिसिया पचड़े और राजनीतिक ड्रामे का ऐसा खेल, जिसमें हर किरदार बुरी तरह फंस जाता है।
फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इसकी कॉमेडी और टाइमिंग है। यह कोई जबरदस्ती हंसाने वाली फिल्म नहीं है, बल्कि किरदारों के बीच पैदा हुई अजीबोगरीब परिस्थितियों से हंसी निकलती है। जब पर्दे पर एक पात्र दूसरे से सच छुपाने के लिए बेतुकी सफाइयां देता है, तो थिएटर ठहाकों से गूंज उठता है। मुदस्सर अज़ीज़ ने ड्रामा और ह्यूमर का ऐसा मेल तैयार किया है जो इसे एक परफेक्ट फैमिली एंटरटेनर बनाता है।

एक्टिंग
आयुष्मान खुराना: प्रजापति पांडे के रूप में आयुष्मान एक बार फिर साबित करते हैं कि मिडिल-क्लास उलझनों वाले किरदारों में उनका कोई मुकाबला नहीं है।
वामिका गब्बी: अपर्णा के रोल में वामिका बेहद नेचुरल और ग्रेसफुल लगी हैं।
तिग्मांशु धूलिया: एक नेता के कड़क अंदाज में उन्होंने स्क्रीन पर अपनी जबरदस्त मौजूदगी दर्ज कराई है।
रकुल प्रीत सिंह: रकुल ने भी अपने छोटे लेकिन अहम रोल से मनोरंजन में बढ़िया योगदान दिया है।
सारा अली खान: फिल्म की असली 'सरप्राइज पैकेज'
अगर इस फिल्म का कोई एक नाम लेना हो जिसने सबसे ज्यादा प्रभावित किया, तो वह है सारा अली खान। सारा ने चंचल के किरदार में जान फूंक दी है। फिल्म के पहले हिस्से पर उनका पूरा कब्जा है। उनकी कॉमिक टाइमिंग, इमोशनल सीन में सहजता और पर्दे पर उनकी एनर्जी फिल्म को एक अलग लेवल पर ले जाती है। आयुष्मान खुराना के साथ उनकी केमिस्ट्री बहुत ही ताजी और प्यारी लगती है। एक अभिनेत्री के तौर पर सारा की ग्रोथ यहाँ साफ़ झलकती है।

डायरेक्शन
मुदस्सर अज़ीज़ का निर्देशन सधा हुआ है। उन्हें पता है कि कब कहानी को रफ्तार देनी है और कब इमोशन्स को। फिल्म में 90 के दशक के सुपरहिट गानों का इस्तेमाल (जैसे 'हमने वहीं लगाया दिल') दर्शकों को पुरानी यादों में ले जाता है और फिल्म के माहौल को हल्का-फुल्का बनाए रखता है। रेड चिलीज़ द्वारा बनाए गए CGI जानवर (चीता, भेड़िया) काफी असली लगते हैं, जो एक फॉरेस्ट ऑफिसर की कहानी में जरूरी थे। हल्की-फुल्की कॉमेडी और पारिवारिक मनोरंजन: फिल्म को एक ऐसी ब्रीज़ी (हल्की-फुल्की) फैमिली कॉमेडी के रूप में तैयार किया गया है, जिसे परिवार के सभी सदस्य साथ बैठकर देख सकते हैं। यह फिल्म किसी भारी-भरकम ड्रामे के बजाय मजेदार स्थितियों और गुदगुदाने वाले पलों पर आधारित है।
म्यूजिक: फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर और गाने कहानी के फ्लो में बाधा नहीं बनते, बल्कि उसे सपोर्ट करते हैं।