आखिर ट्रंप के जाल में फंस गया चीन! ईरान से दूरी बनाने का किया वादा, कहा-"अब नहीं देगा कोई भी मदद"

Edited By Updated: 18 May, 2026 11:17 AM

china committed to us on not providing material support to iran

अमेरिका ने दावा किया है कि चीन ने राष्ट्रपति Donald Trump को भरोसा दिया है कि वह ईरान को किसी तरह की मदद नहीं देगा। इसे ट्रंप की बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है। मिडिल ईस्ट संकट और होर्मुज तनाव के बीच चीन का यह रुख वैश्विक राजनीति में बड़ा बदलाव...

International Desk: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने बड़ा दावा किया है कि चीन आखिरकार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की रणनीतिक चाल में फंस गया है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक बीजिंग ने ट्रंप को भरोसा दिया है कि वह ईरान को किसी भी तरह का सैन्य या रणनीतिक साजो-सामान उपलब्ध नहीं कराएगा। यह दावा ऐसे समय आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है और दुनिया भर की नजरें चीन के रुख पर टिकी हुई हैं।

 

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि  जैमीसन ग्रीर (Jamieson Greer) ने  एक इंटरव्यू में कहा कि ट्रंप का मुख्य उद्देश्य चीन को ईरान से दूरी बनाने के लिए राजी करना था। ग्रीर के अनुसार चीन ने अमेरिका को आश्वासन दिया कि वह ईरान को किसी भी प्रकार की मदद नहीं देगा। विशेषज्ञ इसे ट्रंप की बड़ी कूटनीतिक जीत मान रहे हैं। पिछले कुछ महीनों से अमेरिका लगातार चीन पर दबाव बना रहा था कि वह ईरान को आर्थिक, तकनीकी या सैन्य सहायता न दे। माना जा रहा है कि होर्मुज संकट और वैश्विक तेल आपूर्ति पर बढ़ते खतरे ने चीन को अपने कदम पीछे खींचने पर मजबूर कर दिया।

 

ग्रीर ने साफ कहा कि अमेरिका चीन के साथ कोई संयुक्त सैन्य अभियान नहीं चाहता, लेकिन वॉशिंगटन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि बीजिंग अमेरिकी रणनीति के रास्ते में न आए। रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन की सबसे बड़ी चिंता ऊर्जा आपूर्ति को लेकर है। दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य से चीन को भारी मात्रा में ऊर्जा सप्लाई मिलती है। ऐसे में अगर क्षेत्र में युद्ध बढ़ता है तो चीन की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है। इसी कारण माना जा रहा है कि चीन ने फिलहाल ईरान के समर्थन में खुलकर आने से दूरी बना ली है। इस बीच अमेरिका ने दावा किया है कि चीन अमेरिकी मांस निर्यात फिर से शुरू करने, जैव-प्रौद्योगिकी व्यापार की समीक्षा करने और लगभग 200 बोइंग विमान खरीदने पर भी सहमत हुआ है।

 

हालांकि चीन ने अभी तक इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। ट्रंप प्रशासन इसे अमेरिका-चीन संबंधों में “रणनीतिक स्थिरता” की दिशा में बड़ा कदम बता रहा है। वहीं आलोचकों का कहना है कि ट्रंप चीन पर दबाव बनाकर मिडिल ईस्ट में ईरान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने की कोशिश कर रहे हैं। अगर चीन वास्तव में ईरान से दूरी बनाता है, तो इसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट ही नहीं बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन और ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ सकता है।

  

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