Starlink Satelite Internet: स्टारलिंक को सरकार की तरफ से ग्रीन सिंग्नल, 6 महीनों के ल‍िए मिला 'खास' स्‍पेक्‍ट्रम

Edited By Updated: 05 Sep, 2025 08:36 PM

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एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के ट्रायल के लिए छह महीने का प्रोविजनल स्पेक्ट्रम मिला है। दूरसंचार विभाग ने कंपनी को यूनिफाइड लाइसेंस भी जारी किया है। स्टारलिंक शुरुआत में 10 जगहों पर ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर बनाएगा।...

नेशनल डेस्क : एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के लिए ट्रायल शुरू करने की अनुमति मिल गई है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने स्टारलिंक को गैर-व्यावसायिक ट्रायल के लिए प्रोविजनल स्पेक्ट्रम आवंटित किया है। यह स्पेक्ट्रम छह महीने की अवधि के लिए दिया गया है, जिसके दौरान कंपनी सैटेलाइट इंटरनेट की तकनीकी और सुरक्षा टेस्टिंग करेगी।

यूनिफाइड लाइसेंस और सुरक्षा शर्तें
मनी कंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, दूरसंचार विभाग ने स्टारलिंक सैटेलाइट कम्युनिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड को यूनिफाइड लाइसेंस जारी किया है। यह लाइसेंस स्टारलिंक को तब मिला, जब कंपनी ने DoT द्वारा निर्धारित सुरक्षा संबंधी शर्तों सहित सभी जरूरी शर्तों को स्वीकार कर लिया। इन शर्तों का पालन सभी सैटेलाइट कम्युनिकेशन कंपनियों के लिए अनिवार्य है।

DoT के अनुसार, स्टारलिंक भारत में शुरुआत में 10 स्थानों पर अपना ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करेगी, जिसमें मुंबई इसका मुख्य हब होगा। कंपनी को कमर्शियल रोलआउट से पहले भारतीय सुरक्षा मानदंडों का पालन सुनिश्चित करना होगा। स्टारलिंक को ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन बाय सैटेलाइट (GMPCS), कमर्शियल VSAT CUG, और इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर (ISP) 'A' सर्विस के लिए भी अनुमति प्राप्त हो चुकी है।

छह महीने का ट्रायल स्पेक्ट्रम
दूरसंचार राज्य मंत्री पेम्मासानी चंद्र शेखर ने राज्यसभा में बताया कि अस्थायी स्पेक्ट्रम का आवंटन अक्टूबर 2023 में जारी दिशानिर्देशों के तहत किया गया है। यह स्पेक्ट्रम केवल तकनीकी और सुरक्षा अनुपालन प्रदर्शित करने के लिए छह महीने की अवधि तक के लिए दिया गया है और इसका उपयोग व्यावसायिक सेवाओं के लिए नहीं किया जा सकता।

स्टारलिंक का अगला कदम पूर्ण स्पेक्ट्रम असाइनमेंट प्राप्त करना है, जिसके नियमों को अभी अंतिम रूप दिया जा रहा है। नए नियमों के तहत, स्पेक्ट्रम शुरू में पांच साल के लिए आवंटित होगा, जिसे दो साल तक बढ़ाया जा सकता है। यह ट्रायल आवंटन स्टारलिंक को व्यापक रोलआउट से पहले ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने और सुरक्षा परीक्षण में तेजी लाने में मदद करेगा।

कब शुरू होंगी सेवाएं?
रिपोर्ट्स के अनुसार, स्टारलिंक 2025 के अंत तक भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू कर सकता है, बशर्ते उसे स्पेक्ट्रम और गेटवे क्लीयरेंस मिल जाए। कीमत के मामले में संकेत मिले हैं कि भारत में स्टारलिंक का मासिक प्लान पड़ोसी देशों भूटान और बांग्लादेश की तुलना में सस्ता होगा, जहां वर्तमान में ग्राहक लगभग 3,000 रुपये मासिक और 30,000 रुपये की एकमुश्त इंस्टॉलेशन फीस का भुगतान करते हैं।

भारत में सैटेलाइट इंटरनेट का भविष्य
स्टारलिंक के अलावा, भारत में अन्य सैटेलाइट इंटरनेट प्रदाता जैसे यूटीसैट वनवेब और जियो-एसईएस की संयुक्त कंपनी ऑर्बिट कनेक्ट इंडिया भी इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। ये कंपनियां भी GMPCS लाइसेंस धारक हैं और नवंबर 2025 तक प्रोविजनल स्पेक्ट्रम का उपयोग कर रही हैं। स्टारलिंक की प्रगति इसे भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के रोलआउट में अग्रणी बना सकती है, खासकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में, जहां पारंपरिक इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं।

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