Edited By Rohini Oberoi,Updated: 23 Aug, 2026 11:58 AM

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, सफर, दफ्तर में काम की व्यस्तता या आसपास साफ टॉयलेट न मिलने के कारण अक्सर लोग पेशाब को लंबे समय तक रोककर रखते हैं। कभी-कभार ऐसा होना स्वाभाविक है लेकिन अगर यह आपकी रोजमर्रा की आदत बन चुकी है तो यह आपके यूरिनरी सिस्टम और...
Health Advice : आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, सफर, दफ्तर में काम की व्यस्तता या आसपास साफ टॉयलेट न मिलने के कारण अक्सर लोग पेशाब को लंबे समय तक रोककर रखते हैं। कभी-कभार ऐसा होना स्वाभाविक है लेकिन अगर यह आपकी रोजमर्रा की आदत बन चुकी है तो यह आपके यूरिनरी सिस्टम और ब्लैडर को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकती है। चिकित्सकों के अनुसार शरीर के प्राकृतिक संकेतों को नजरअंदाज करना सेहत के लिए भारी पड़ सकता है।
जानकारी के लिए बता दें कि हमारे शरीर में किडनियां खून को लगातार फिल्टर करती हैं। इस प्रक्रिया के दौरान शरीर के अपशिष्ट और अतिरिक्त पानी को यूरिन के रूप में अलग किया जाता है। यह यूरिन मूत्राशय में जाकर इकट्ठा होता है। जब ब्लैडर एक निश्चित सीमा तक भर जाता है तो हमारा मस्तिष्क पेशाब करने का संकेत देता है। इस संकेत को दबाना सेहत से खिलवाड़ करने जैसा है।
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आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मूत्राशय में ज्यादा देर तक यूरिन जमा रहने से उसमें बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। इसके कारण UTI का इंफेक्शन हो जाता है। इसके मुख्य लक्षण पेशाब के दौरान तेज जलन, दर्द, पेट के निचले हिस्से में ऐंठन और बार-बार टॉयलेट जाना हैं। बार-बार यूरिन रोकने से मूत्राशय की मांसपेशियां जरूरत से ज्यादा खिंच जाती हैं। इससे समय के साथ ब्लैडर कमजोर हो जाता है और वह सामान्य तरीके से खाली नहीं हो पाता।

जो लोग नियमित रूप से पेशाब रोकते हैं उन्हें बाद में 'रिटेंशन' की समस्या हो सकती है। यानी टॉयलेट जाने के बाद भी ऐसा महसूस होता है कि ब्लैडर पूरी तरह खाली नहीं हुआ है। जब ब्लैडर पूरी तरह भर जाता है और यूरिन बाहर नहीं निकलता तो बैक-प्रेशर के कारण किडनियों पर दबाव पड़ता है जिससे पथरी या संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

ऐसे में जब भी पेशाब की इच्छा हो तो सुविधानुसार तुरंत आपको टॉयलेट जाना चाहिए। कई लोग टॉयलेट जाने से बचने के लिए कम पानी पीते हैं जो कि बिल्कुल गलत तरीका है। दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। वहीं अगर आपको लगता है कि यदि पेशाब करते समय तेज दर्द या जलन हो, यूरिन का रंग बदला हुआ या खून दिखाई दे या बार-बार इंफेक्शन हो रहा हो तो बिना देर किए विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह लें।