Sawan Last Somwar 2026: सावन के आखिरी सोमवार पर बन रहा महासंयोग! 5 दुर्लभ योगों में करें भोलेनाथ का जलाभिषेक, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Edited By Updated: 21 Aug, 2026 12:11 PM

sawan last somwar 2026

Sawan 4th Somwar 2026: सावन का चौथा और अंतिम सोमवार 24 अगस्त 2026 को है। इस दिन भगवान शिव की पूजा के साथ बन रहे हैं 5 अद्भुत संयोग। जानें जलाभिषेक के शुभ मुहूर्त और सही पूजा विधि।

Last Sawan Somwar 2026: भगवान शिव की भक्ति का पावन महीना सावन अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है। शिव भक्तों के लिए सावन के सोमवार का व्रत रखना, शिवलिंग पर जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करना बेहद कल्याणकारी माना जाता है। साल 2026 में सावन का चौथा और आखिरी सोमवार 24 अगस्त को पड़ रहा है। इस अंतिम सोमवार का धार्मिक महत्व और भी बढ़ गया है, क्योंकि इस दिन एक या दो नहीं, बल्कि पूरे 5 बेहद शुभ और दुर्लभ संयोग बनने जा रहे हैं।

आखिरी सोमवार पर बनने वाले 5 महासंयोग
इस साल सावन के अंतिम सोमवार पर ग्रहों और नक्षत्रों की ऐसी स्थिति बन रही है जो साधकों को विशेष पुण्य प्रदान करेगी:
सावन पुत्रदा एकादशी पारण का दुर्लभ मेल: 24 अगस्त को सावन पुत्रदा एकादशी व्रत का पारण किया जाएगा। इस वजह से इस दिन भगवान विष्णु और देवाधिदेव महादेव दोनों की एक साथ पूजा का परम फलदायी संयोग बन रहा है।

प्रीति योग: सोमवार की सुबह से ही प्रीति योग विद्यमान रहेगा, जो सुबह 7 बजकर 4 मिनट तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में इसे किसी भी शुभ और सकारात्मक कार्य को शुरू करने के लिए बहुत अच्छा माना जाता है।

आयुष्मान योग: सुबह 7 बजकर 4 मिनट के बाद पूरे दिन आयुष्मान योग रहेगा। यह योग दीर्घायु, अच्छी सेहत और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह के लिए जाना जाता है।

कैलाश पर शिववास: इस पावन दिन पर भगवान शिव का निवास स्थान खुद उनका परम धाम कैलाश पर्वत माना जा रहा है। शिववास के कैलाश पर होने के दौरान रुद्राभिषेक करना घर-परिवार में सुख, समृद्धि और शांति का संचार करता है।

हंसराज योग का अद्भुत संयोग: ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस दिन हंसराज योग भी बन रहा है। इस दौरान गुरु (बृहस्पति) अपनी उच्च राशि कर्क में विराजमान हैं, जबकि चंद्रमा धनु राशि में और सूर्य सिंह राशि में रहेंगे। इस योग को जीवन में उन्नति और शुभता लाने वाला माना गया है।

Jalabhishek Shubh Muhurat जलाभिषेक और रुद्राभिषेक के शुभ मुहूर्त 
सावन के इस पावन दिन पर ब्रह्म मुहूर्त से ही जलाभिषेक शुरू किया जा सकता है। हालांकि, विशेष फल और अपनी सुविधानुसार आप इन शुभ चौघड़ियों और मुहूर्तों में पूजा संपन्न कर सकते हैं:

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:27 बजे से लेकर 05:11 बजे तक।
अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: सुबह 05:55 बजे से लेकर 07:32 बजे तक।
शुभ-उत्तम मुहूर्त: सुबह 09:09 बजे से लेकर 10:46 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:57 बजे से लेकर दोपहर 12:49 बजे तक।
प्रदोष काल (संध्या पूजा): शाम 06:55 बजे से लेकर रात 07:15 बजे तक।

(विशेष नोट: यद्यपि सावन के महीने में शिवजी को जल अर्पित करने के लिए किसी विशिष्ट मुहूर्त की प्रतीक्षा आवश्यक नहीं है, आप पूरे दिन अपनी अगाध श्रद्धा से किसी भी समय जल चढ़ा सकते हैं।)

सावन महीने में की गई शिव पूजा जीवन भर किए गए पूजा-पाठ से भी श्रेष्ठ फल देती है। इससे भगवान शिव शीघ्र ही प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं। 24 अगस्त को सावन का अंतिम सोमवार है यदि आप अपनी राशि के अनुसार शिव का पूजन करेंगे तो भगवान शंकर की अत्यधिक कृपा प्राप्त होगी। राशि अनुसार पूजन से मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होती हैं।

मेष : शिवलिंग का दही से अभिषेक करें और लाल गुलाल से पूजन करें। जल्द लाभ प्राप्त होगा।  
 
वृषभ : कच्चे दूध से शिव का अभिषेक और जल से स्नान कराना चाहिए। शिव के वाहन नंदी अर्थात बैल को चारा एवं रोटी खिलाने से लाभ होता है।
 
मिथुन : आपको शिव-पार्वती को लाल कनेर के पुष्प, शहद एवं पिस्ता से भोग लगाना चाहिए। बिल्व-पत्र के छह पत्ते चढ़ाने से लाभ होगा।
 
कर्क : आपको कच्चे दूध, सफेद आकड़े एवं दही से पूजन करना चाहिए। मावे से बने मिष्ठान का भोग लगाने से भगवान शिव जल्द प्रसन्न होते हैं।
 
सिंह : आपको शीतल जल से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए तथा शिव मानस पूजा का पाठ प्रतिदिन करना चाहिए। विशेष कामनाएं पूर्ण होती हैं।
 
कन्या : आपको शिवलिंग पर मूंग की दाल से बनी मिठाई अर्पण करनी चाहिए। बिल्वपत्र, एक फल तथा शिव महिमा का पाठ करना श्रेष्ठ रहता है।
 
तुला : आपको शिवलिंग पर सफेद वस्त्र अर्पण करना चाहिए। जीवन साथी के स्वास्थ्य में सुधार होगा।
 
वृश्चिक : आप गरीबों की सेवा करेंगे तो बुरे प्रभाव दूर हो जाएंगे। 
 
धनु : बेसन से बनी मिठाई शिव जी को अर्पित करते हैं तो लाभ प्राप्त होगा। पीले रंग के वस्त्र माता पार्वती को अर्पण करें तो अत्यधिक फायदा मिलेगा। 
 
मकर : नीले पुष्पों से शिव का पूजन करें। इसके साथ ही धतूरे एवं धतूरे के पुष्पों से शिव का पूजन करेंगे तो खास लाभ होगा। 
 
कुंभ : भगवान शिव की प्रसन्नता के लिए किसी जरूरतमंद विद्यार्थी की मदद करनी चाहिए। यह विशेष लाभकारी रहेगा। इससे शिवजी की प्रसन्नता प्राप्त होगी और अचल सम्पत्ति प्राप्त होने के योग बनेंगे।
 
मीन : शिव जी की प्रसन्नता के लिए किसी भी एक ज्योर्तिलिंग का दर्शन करना चाहिए। यह संभव न हो तो मन से कल्पना करके ही भगवान के दर्शन करें या द्वादश ज्योर्तिलिंग का पाठ करके लाभ प्राप्त किया जा सकता है। 

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