भारत में बढ़ती डायबिटीज चिंता, यूनानी चिकित्सा ने बताए रोकथाम और कंट्रोल के प्राकृतिक उपाय

Updated: 14 Nov, 2025 06:11 PM

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डायबिटीज़ सिर्फ़ ब्लड शुगर का खेल नहीं है यह दिल, किडनी, आंखें, नसों और मानसिक स्वास्थ्य तक को प्रभावित करती है। डॉ नौशाद अली राणा इसके रोकथाम और कंट्रोल के प्राकृतिक उपाय बताते हैं।

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। भारत में डायबिटीज़ एक बड़ी पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी बनती जा रही है। The Lancet की हालिया रिपोर्ट बताती है कि दुनिया के कुल डायबिटीज़ मरीज़ों में से लगभग एक-चौथाई भारत में हैं, जो इसे वैश्विक स्तर पर सबसे ज़्यादा प्रभावित देशों में शामिल करता है। डायबिटीज़ सिर्फ़ ब्लड शुगर का खेल नहीं है यह दिल, किडनी, आंखें, नसों और मानसिक स्वास्थ्य तक को प्रभावित करती है। डॉ नौशाद अली राणा इसके रोकथाम और कंट्रोल के प्राकृतिक उपाय बताते हैं।

टाइप 2 डायबिटीज़: भारत में सबसे आम और सबसे अधिक रोके जाने योग्य

भारत में बढ़ते मामलों के पीछे सबसे बड़ा कारण है — गलत जीवनशैली।
ज्यादा कैलोरी, कम नींद, तनाव और शारीरिक निष्क्रियता शरीर में इंसुलिन रेज़िस्टेंस पैदा करती है, जिससे ब्लड शुगर बढ़ने की स्थिति बनती है।

यूनानी दृष्टिकोण: पाचन संतुलन बिगड़ता है तो बढ़ती है डायबिटीज़

यूनानी चिकित्सा के अनुसार बीमारी की जड़ शरीर की चार पाचन अवस्थाओं- गैस्ट्रिक, हेपेटिक, वैस्क्यूलर और सेल्युलर डाइजेशन में गड़बड़ी से होती है। दीर्घकालिक असंतुलन के कारण सेल्युलर डाइजेशन कमजोर पड़ जाता है, जिससे शुगर ऊर्जा के रूप में उपयोग नहीं हो पाती और रक्त में जमा होती चली जाती है।

यूनानी प्रणाली 6 लाइफस्टाइल तत्वों पर ज़ोर देती है:

हवा की गुणवत्ता

शुद्ध हवा बेहतर मेटाबॉलिज़्म और मानसिक स्पष्टता देती है।

संतुलित और सादा खानपान

प्रोसेस्ड फूड और ओवरईटिंग से डायबिटीज़ की संभावना बढ़ जाती है।

गतिविधि और आराम का संतुलन

नियमित व्यायाम ग्लूकोज़ को मांसपेशियों तक पहुंचाने में मदद करता है।

मानसिक शांति और विश्राम

लगातार तनाव खाने की लालसा और ब्लड शुगर दोनों को बढ़ाता है।

पर्याप्त नींद

गहरी नींद इंसुलिन सेंसिटिविटी बनाए रखती है।

शरीर का डिटॉक्स

पसीना, मूत्र और मल के जरिए टॉक्सिन्स का निकलना शरीर को दुरुस्त रखता है।

यूनानी हर्बल और डाइटरी उपाय

जिन लोगों को पहले से डायबिटीज़ है, उनके लिए यूनानी चिकित्सा में हर्बल संयोजन + आहार + व्यायाम को सबसे असरदार माना गया है।

मेटाबॉलिक रेगुलेशन के लिए जड़ी-बूटियां

जामुन

करेला

गिलोय

मेथी

कलौंजी

दालचीनी

मकोय

ब्लड प्यूरीफिकेशन के लिए:

नीम

चिरायता

शतारा

गिलोय

कपूर

गट हेल्थ के लिए:

हंजल

सना

त्रिफला

प्रमुख यूनानी दवाएं:
जवारिश जालीनूस, जवारिश बिस्बासा, अर्क चिरायता, सफूफ गिलोय, कुर्स ज़ियाबीटस ख़स, सफूफ ज़ियाबीटस, कुर्स कफूर आदि, जो पाचन सुधारकर ब्लड शुगर नियंत्रण में मदद करती हैं।

लाइफस्टाइल और मूवमेंट: डायबिटीज़ रोकथाम की नींव
रोज़ाना कम से कम 30–40 मिनट वॉक, योग, स्विमिंग या साइकलिंग
इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाती है और वजन संतुलित रखती है। साथ ही मेडिटेशन और डीप ब्रीदिंग तनाव कम करके ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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