ईरान-इजरायल तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, WTI अप्रैल 2024 के बाद पहली बार $85 के पार

Edited By Updated: 06 Mar, 2026 05:39 PM

crude oil prices rise amid iran israel tensions wti crosses 85

तनाव के बीच वैश्विक तेल बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। WTI क्रूड अप्रैल 2024 के बाद पहली बार 85 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है।

बिजनेस डेस्कः ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच छिड़ी जंग के बीच वैश्विक तेल बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। ब्रेंट क्रूड 88 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड भी अप्रैल 2024 के बाद पहली बार 85 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया।

ऊर्जा बाजार में यह तेजी उस समय आई जब Qatar ने चेतावनी दी कि क्षेत्र में चल रहे तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति में लंबे समय तक बाधा आ सकती है। इस चेतावनी के बाद वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ गई और निवेशकों ने ऊर्जा कीमतों में और तेजी की आशंका जताई। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों देशों के बीच संघर्ष लंबा खिंचता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।

बाजार में बढ़ी हलचल

इस घटनाक्रम को वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। हालांकि बाजार में उतार-चढ़ाव भी काफी देखने को मिल रहा है। गौरतलब है कि फरवरी 2026 के आखिर में WTI कच्चे तेल की कीमत 66 डॉलर प्रति बैरल से भी नीचे चली गई थी, जो उस समय के सबसे निचले स्तरों में से एक था लेकिन अब कीमतों में आई इस तेज बढ़ोतरी ने निवेशकों और कारोबारियों का ध्यान फिर से अपनी ओर खींच लिया है।

भारत पर क्या होगा असर?

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत के लिए चिंता का विषय हैं क्योंकि देश अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा तेल आयात करता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमत में 1 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी होने पर भारत का सालाना आयात बिल करीब 16,000 करोड़ रुपए बढ़ जाता है। भारत अपनी तेल सप्लाई का लगभग 50% हिस्सा मिडिल ईस्ट के देशों से हॉर्मुज स्टेट के रास्ते ही मंगाता है, जहां अब युद्ध की वजह से सप्लाई प्रभावित हुई है। 

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