Edited By Sahil Kumar,Updated: 28 Oct, 2026 12:54 PM

महिलाओं में थायराइड से जुड़ी समस्याएं पुरुषों के मुकाबले ज्यादा देखने को मिलती हैं। इसके पीछे शरीर में होने वाले हॉर्मोनल बदलाव और इम्यून सिस्टम की भूमिका अहम मानी जाती है।
Thyroid: महिलाओं में थायराइड से जुड़ी समस्याएं पुरुषों के मुकाबले ज्यादा देखने को मिलती हैं। इसके पीछे शरीर में होने वाले हॉर्मोनल बदलाव और इम्यून सिस्टम की भूमिका अहम मानी जाती है। पीरियड्स, गर्भावस्था और मेनोपॉज के दौरान महिलाओं के शरीर में कई बदलाव होते हैं, जो उनकी सेहत को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में थायराइड के लक्षणों को पहचानना और समय पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
अमेरिकन थायराइड एसोसिएशन के अनुसार, महिलाओं में पुरुषों की तुलना में थायराइड संबंधी बीमारियां अधिक आम हैं। आइए जानते हैं कि इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं और थायराइड की जांच कब करानी चाहिए।
हॉर्मोनल बदलाव
महिलाओं के जीवन में प्यूबर्टी, गर्भावस्था और मेनोपॉज जैसे कई चरण आते हैं। इस दौरान एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन समेत कई हॉर्मोन के स्तर में बदलाव होता है। शरीर में होने वाले ये बदलाव स्वास्थ्य को अलग-अलग तरह से प्रभावित कर सकते हैं। थायराइड की समस्या को समझते समय हॉर्मोनल बदलावों को भी ध्यान में रखा जाता है।
ऑटोइम्यून बीमारी भी हो सकती है वजह
महिलाओं में थायराइड की परेशानी का एक प्रमुख कारण ऑटोइम्यून बीमारियां हैं। हाशिमोटो थायराइडाइटिस इसका एक उदाहरण है। इस बीमारी में शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से थायराइड ग्रंथि पर हमला करने लगता है। इससे ग्रंथि की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है और थायराइड हॉर्मोन का उत्पादन कम हो सकता है।
तनाव
लगातार तनाव रहने पर शरीर में कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे स्ट्रेस हॉर्मोन का स्तर बढ़ सकता है। शरीर की तनाव प्रतिक्रिया और हॉर्मोनल प्रक्रियाओं के बीच संबंध होता है। थायराइड हॉर्मोन को नियंत्रित करने में मस्तिष्क का हाइपोथैलेमस और पिट्यूटरी ग्रंथि भी अहम भूमिका निभाते हैं।
हालांकि, तनाव को थायराइड की समस्या का एकमात्र कारण नहीं माना जाता। थायराइड से जुड़ी परेशानी होने पर इसके पीछे मौजूद अन्य संभावित कारणों की भी जांच करना जरूरी है।
जिम्मेदारियों के बीच संतुलन
कई महिलाओं को घर और दफ्तर की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। ऐसे में वे अक्सर अपनी सेहत और मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर देती हैं। लंबे समय तक तनाव में रहने से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए रोजमर्रा की व्यस्तता के बीच आराम, शारीरिक गतिविधि और मानसिक स्वास्थ्य के लिए समय निकालना जरूरी है।
थायराइड की समस्या से बचाव के लिए क्या करें?
- तनाव या परेशानी होने पर परिवार के सदस्यों या किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें।
- नियमित शारीरिक गतिविधि और मेडिटेशन तनाव को संभालने में मदद कर सकते हैं।
- थायराइड से जुड़े लक्षण महसूस होने पर डॉक्टर से सलाह लें।
- अपनी सेहत, लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर जरूरी जांच करवाएं।
थायराइड की जांच कब करानी चाहिए?
थायराइड की जांच के लिए टीएसएच (TSH) टेस्ट महत्वपूर्ण होता है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर टी3 (T3) और टी4 (T4) हॉर्मोन की जांच कराने की सलाह भी दे सकते हैं। हालांकि, हर महिला को नियमित रूप से हर साल थायराइड की सभी जांच कराना जरूरी नहीं है। जांच की जरूरत उम्र, लक्षणों, मेडिकल हिस्ट्री और अन्य जोखिम कारकों पर निर्भर करती है। इसलिए जांच कब और कौन-सी करानी है, इसका फैसला डॉक्टर की सलाह से करना बेहतर है।