UN में भिड़े अमेरिका-क्यूबा: पोडियम पर पहुंचे मंत्री तो भड़के अमेरिकी राजदूत, बोले-'यह अमेरिका है...पीछे हटिए'(Video)

Edited By Updated: 28 Oct, 2026 04:08 PM

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संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिकी प्रतिबंधों पर बहस के दौरान अमेरिका और क्यूबा के प्रतिनिधियों के बीच तीखा टकराव हुआ। अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने क्यूबा के विदेश मंत्री से कहा, 'यह संयुक्त राष्ट्र है, आपकी तानाशाही नहीं।' हंगामे के कारण...

New York: संयुक्त राष्ट्र महासभा में मंगलवार को अमेरिका और क्यूबा के बीच तीखी बहस ने उस समय हंगामे का रूप ले लिया, जब दोनों देशों के प्रतिनिधि एक-दूसरे के सामने आ गए। क्यूबा पर दशकों से लगाए गए अमेरिकी आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंधों को खत्म करने के प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विवाद इतना बढ़ गया कि सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी। यह घटना ऐसे समय हुई है, जब अमेरिका और क्यूबा के बीच पहले से ही तनाव बना हुआ है। क्यूबा ने अमेरिका पर आर्थिक दबाव बढ़ाने और प्रस्ताव के खिलाफ मतदान कराने के लिए दूसरे देशों को प्रभावित करने का आरोप लगाया है। विवाद की शुरुआत तब हुई, जब संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार पर दमन और भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे थे। इसी दौरान क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज पैरिला पोडियम के पास पहुंचे और अमेरिकी प्रतिनिधि को रोकने की मांग करने लगे।

 

Charging the podium is what you do when you can't argue with the photos. Cuba's foreign minister rushed at Mike Waltz at the UN on Tuesday while Waltz held up photos of Fidel Castro's Rolex and the family's private island. His answer: "Back up!" The embargo vote is Wednesday. https://t.co/VuPXWiQEwh

— TechPulse Daily (@DailyTechpulse) October 27, 2026

 

इस पर वॉल्ट्ज भड़क गए। उन्होंने क्यूबा के विदेश मंत्री से कहा, 'यह संयुक्त राष्ट्र है, आपकी कम्युनिस्ट तानाशाही नहीं। आप मुझे चुप नहीं करा सकते।' अमेरिकी राजदूत ने क्यूबा के मंत्री और उनके प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को पीछे हटने के लिए कहा। उन्होंने तीखे अंदाज में यह भी कहा, 'आप जानते हैं कि आप किससे बात कर रहे हैं? यह अमेरिका है, पीछे हटिए।' दोनों पक्षों के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए सत्र की अध्यक्षता कर रहे अधिकारी ने कार्यवाही कुछ समय के लिए रोक दी। दोनों प्रतिनिधिमंडलों को अपनी-अपनी जगह लौटने का निर्देश दिया गया। क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज पैरिला ने अमेरिका पर संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों को प्रभावित करने के लिए अभियान चलाने का आरोप लगाया। उनका दावा था कि अमेरिका प्रस्ताव के खिलाफ मतदान कराने के लिए दूसरे देशों को वीजा प्रतिबंधों और आर्थिक पाबंदियों की धमकी दे रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रस्ताव का विरोध करने वाले देशों की सरकारों के विरोधियों को समर्थन देने की बात कही जा रही है।

 

दूसरी ओर, अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों से क्यूबा की ओर से पेश प्रस्ताव को खारिज करने की अपील की। इस तरह प्रतिबंधों को लेकर दोनों देशों का पुराना विवाद अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बार फिर तीखे टकराव में बदल गया। अमेरिका और क्यूबा के बीच आर्थिक और राजनीतिक तनाव कई दशकों पुराना है। क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार और अमेरिका के बीच संबंध लंबे समय से विवादों में रहे हैं। अमेरिकी प्रतिबंधों ने क्यूबा के व्यापार, वित्तीय लेनदेन और आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित किया है। क्यूबा वर्ष 1992 से संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिकी प्रतिबंधों को समाप्त करने की मांग वाला प्रस्ताव पेश करता रहा है। यह प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, लेकिन इसे आम तौर पर अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिलता रहा है। पिछले वर्ष इस प्रस्ताव के पक्ष में 165 देशों ने मतदान किया था, जबकि सात देशों ने विरोध किया और 12 देश मतदान से दूर रहे। पिछले दो दशकों में प्रस्ताव को मिला यह सबसे कमजोर समर्थन था।
  

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