Edited By Tanuja,Updated: 24 Aug, 2026 07:44 PM

नोमुरा की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में AI नौकरियां खत्म करने से ज्यादा नए रोजगार पैदा कर रहा है, लेकिन इसका फायदा असमान है। IT सेक्टर में सीनियर और हाई-स्किल कर्मचारियों की मांग बढ़ी है, जबकि फ्रेशर्स की एंट्री लेवल नौकरियां घट रही हैं। AI से पैदा...
Tokyo: दुनिया में AI को नौकरीपेशा लोगों के लिए सबसे बड़ा खतरा माना जा रहा है । लोगों की सबसे बड़ी चिंता यही है कि AI इंसानों की नौकरियां छीन लेगा। लेकिन जापानी फाइनेंशियल सर्विस कंपनी नोमुरा की रिपोर्ट एक अलग तस्वीर पेश करती है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में AI के कारण नौकरियां खत्म होने के बजाय नए रोजगार के अवसर ज्यादा बन रहे हैं। हालांकि इसका फायदा सभी को बराबर नहीं मिल रहा। IT सेक्टर में सीनियर और हाई-स्किल कर्मचारियों की मांग बढ़ी है, जबकि फ्रेशर्स और जूनियर्स के लिए एंट्री लेवल नौकरियां मुश्किल होती जा रही हैं।
AI से जॉब मार्केट में आया ‘K-शेप्ड स्प्लिट’
नोमुरा ने इस बदलाव को K-शेप्ड स्प्लिट कहा है। इसका मतलब है कि रोजगार बाजार दो अलग दिशाओं में बंटता जा रहा है। एक तरफ अनुभवी कर्मचारियों की मांग बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ फ्रेशर्स और कम अनुभव वाले कर्मचारियों के लिए अवसर घट रहे हैं। कंपनियां अब ऐसे कर्मचारियों को प्राथमिकता दे रही हैं, जिन्हें केवल तकनीकी काम का ज्ञान न हो, बल्कि मैनेजमेंट, बिजनेस और जटिल समस्याओं को समझने की क्षमता भी हो।
सीनियर कर्मचारियों की बढ़ रही मांग
AI ने कई रूटीन और दोहराए जाने वाले काम आसान कर दिए हैं। ऐसे में कंपनियों को ऐसे लोगों की जरूरत ज्यादा महसूस हो रही है, जो AI टूल्स का इस्तेमाल करके बड़े बिजनेस फैसले ले सकें और जटिल समस्याओं को हल कर सकें। नोमुरा के मुताबिक दक्षिण कोरिया में भी AI के ज्यादा इस्तेमाल वाले सेक्टरों में इसी तरह का ट्रेंड देखने को मिला है।यानी आने वाले समय में सिर्फ डिग्री या बेसिक टेक्निकल स्किल काफी नहीं हो सकती। अनुभव, बिजनेस समझ और AI के साथ काम करने की क्षमता ज्यादा महत्वपूर्ण होती जा रही है।
कंपनियां रोक रहीं नई भर्ती
AI के दौर में कंपनियों का एक और तरीका सामने आया है। कई कंपनियां पुराने कर्मचारियों को बड़े पैमाने पर निकालने के बजाय नई भर्तियां कम कर रही हैं। इसे कई जगह ‘साइलेंट फायरिंग’ कहा जा रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर फ्रेशर्स पर पड़ रहा है। कॉलेज कैंपस में होने वाली प्लेसमेंट ड्राइव भी कई कंपनियों में पहले की तुलना में कम हुई हैं। यानी नौकरी कर रहे अनुभवी लोगों के लिए स्थिति अपेक्षाकृत सुरक्षित हो सकती है, लेकिन नौकरी की तलाश में बाजार में प्रवेश करने वाले युवाओं के सामने प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक AI की वजह से पैदा होने वाले नए रोजगार में 90% से ज्यादा हिस्सेदारी टेक्नोलॉजी सेक्टर की है। बाकी सभी सेक्टरों की हिस्सेदारी 10% से भी कम बताई गई है। इससे साफ है कि AI का फायदा उठाने के लिए टेक्नोलॉजी से जुड़ी स्किल हासिल करना युवाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। भारत में AI से जुड़े कई नए क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं।
इन क्षेत्रों में आने वाली नौकरियां भारत के मौजूदा IT और सर्विस सेक्टर के अनुभव से भी जुड़ती हैं। AI रोजगार के मामले में भारत और चीन के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर भी दिखाई देता है। भारत में AI से जुड़ी नई नौकरियों का बड़ा हिस्सा सपोर्ट और सर्विस आधारित कामों में आ रहा है। दूसरी तरफ चीन में कंपनियां AI के नए मॉडल बनाने और उन्हें विकसित करने के लिए हाई-स्किल्ड ग्रेजुएट्स को भर्ती कर रही हैं। यानी भारत फिलहाल AI के इस्तेमाल और सेवाओं से जुड़े रोजगार में मजबूत है, जबकि चीन AI के मूल विकास और मॉडल निर्माण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। AI से पैदा होने वाली नई नौकरियां केवल टेक कंपनियों तक सीमित नहीं हैं। हालांकि टेक्नोलॉजी के बाहर ऐसे अवसरों की संख्या फिलहाल काफी कम है। उदाहरण के तौर पर बैंकों में AI रिस्क एनालिस्ट और ड्राइवरलेस वाहनों से जुड़े विशेषज्ञों जैसी भूमिकाएं सामने आ रही हैं। इसका मतलब है कि आने वाले समय में AI का असर बैंकिंग, ऑटोमोबाइल और दूसरे सेक्टरों में भी बढ़ सकता है।