दुनिया में होने वाला कुछ भयानक: 66 साल पुरानी भविष्यवाणी फिर चर्चा में, 13 नवंबर 2026 की चर्चा ने मचाई सनसनी

Edited By Updated: 20 Sep, 2026 04:40 PM

scientist who predicted ai says world will end in just weeks in doomsday predict

1960 में प्रकाशित एक वैज्ञानिक शोध को आज 13 नवंबर 2026 को दुनिया के अंत की भविष्यवाणी के रूप में चर्चा मिल रही है। हालांकि शोध का मूल विषय बढ़ती मानव आबादी और सीमित संसाधनों का दबाव था। इसलिए इसे निश्चित कयामत की तारीख नहीं, बल्कि जनसंख्या और...

Washington: दुनिया में महंगाई, बेरोजगारी, तेजी से बदलती तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता को लेकर चिंता के बीच 66 साल पुराना एक वैज्ञानिक शोध फिर चर्चा में है। इंटरनेट पर इसे 2026 में दुनिया खत्म होने की भविष्यवाणी के तौर पर पेश किया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि 13 नवंबर 2026 तक मानव सभ्यता बेहद गंभीर संकट में पहुंच सकती है। लेकिन इस कहानी का वैज्ञानिक संदर्भ सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों से थोड़ा अलग है। यह शोध वर्ष 1960 में अमेरिकी वैज्ञानिक पत्रिका ‘साइंस’ में प्रकाशित हुआ था। इसे यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनॉय के शोधकर्ताओं हेंज वॉन फोर्स्टर, पेट्रीशिया एम. मोरा और लॉरेंस डब्ल्यू. अमियोट ने तैयार किया था।

 

तब दुनिया में सिर्फ 3 अरब थी आबादी
जब यह शोध प्रकाशित हुआ था, उस समय दुनिया की आबादी करीब 3 अरब थी। शोधकर्ताओं ने मानव आबादी में तेजी से हो रही वृद्धि और पृथ्वी के सीमित संसाधनों के बीच संबंध का अध्ययन किया था। उनकी चिंता यह थी कि यदि आबादी इसी रफ्तार से बढ़ती रही तो एक समय ऐसा आ सकता है जब पृथ्वी के संसाधन इंसानों की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं होंगे। इसी गणना और जनसंख्या वृद्धि की प्रवृत्ति से जुड़ी एक तारीख को आज 13 नवंबर 2026 के रूप में दोबारा चर्चा में लाया जा रहा है।

 

क्या वैज्ञानिकों ने सच में ...
 इसे दुनिया खत्म होने की निश्चित तारीख के तौर पर देखना सही नहीं है। मूल शोध का विषय मानव आबादी की वृद्धि और संसाधनों पर उसके दबाव से जुड़ा था। उस समय उपलब्ध आंकड़ों और गणनाओं के आधार पर भविष्य की एक गंभीर स्थिति की ओर संकेत किया गया था। आज की वास्तविक जनसंख्या वृद्धि भी उस समय के अनुमान से अलग दिशा में आगे बढ़ी है। वर्तमान अनुमानों के मुताबिक दुनिया की आबादी करीब 8.3 अरब है और इसके 2080 के दशक में लगभग 10.3 अरब के आसपास पहुंचने के बाद घटने की संभावना जताई जाती है।

 

1798 में माल्थस ने भी दी थी चेतावनी
जनसंख्या और संसाधनों के बीच असंतुलन को लेकर चिंता कोई नई बात नहीं है। अर्थशास्त्री थॉमस माल्थस ने 1798 में चेतावनी दी थी कि मानव आबादी तेजी से बढ़ती रही तो एक समय भोजन की कमी बड़ी तबाही का कारण बन सकती है। हालांकि इतिहास में वैसी वैश्विक तबाही उस रूप में सामने नहीं आई जैसी उस सिद्धांत से आशंका जताई गई थी। इसलिए 1960 के शोध को भी आज के संदर्भ में भविष्य की निश्चित तारीख बताने वाली भविष्यवाणी के बजाय एक पुराने जनसंख्या और संसाधन संबंधी वैज्ञानिक अनुमान के रूप में देखा जा रहा है।

 

असली चेतावनी तारीख नहीं, संसाधनों का दबाव
आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता तेजी से बदलती तकनीक का सबसे चर्चित हिस्सा है। AI के बढ़ते इस्तेमाल से रोजगार, अर्थव्यवस्था और समाज पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर बहस चल रही है। इसी मौजूदा चिंता के बीच पुरानी भविष्यवाणी को एआई और आधुनिक तकनीकी बदलावों से जोड़कर सोशल मीडिया पर चर्चा मिल रही है। इसलिए 13 नवंबर 2026 को दुनिया के अंत की निश्चित तारीख मानने के बजाय इस शोध को एक व्यापक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। बढ़ती आबादी, भोजन, पानी, ऊर्जा और अन्य प्राकृतिक संसाधनों की मांग आज भी दुनिया के सामने महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं। यानी कयामत की तारीख से ज्यादा अहम वह सवाल है जिसे यह पुराना शोध उठाता है-क्या मानव सभ्यता अपने बढ़ते संसाधन दबाव को लंबे समय तक संभाल पाएगी?
 

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