Edited By Tanuja,Updated: 27 Jun, 2026 12:28 PM

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International Desk: अमेरिका के मिशिगन में एक दंपति पर अपने सात वर्षीय बेटे की मौत के मामले में सेकेंड-डिग्री मर्डर (द्वितीय श्रेणी हत्या) का आरोप लगाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि बच्चे को समय पर चिकित्सकीय देखभाल नहीं मिलने और गंभीर लापरवाही के कारण उसकी जान गई। मृतक बच्चे की पहचान कैस्पर ओ'ब्रायन (Cण के रूप में हुई है। उसकी लंबाई करीब 1.3 मीटर (4 फीट 2.5 इंच) थी, जबकि उसका वजन 255 पाउंड (लगभग 116 किलोग्राम) था, जो उसकी उम्र के हिसाब से बेहद असामान्य और गंभीर मोटापे (Morbid Obesity) की श्रेणी में आता है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, बच्चे की मौत डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी (Dilated Cardiomyopathy) के कारण हुई, जो अत्यधिक मोटापे से जुड़ी हृदय संबंधी गंभीर बीमारी है। इस बीमारी में हृदय की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और शरीर में पर्याप्त रक्त पंप नहीं कर पातीं। जांच में सामने आया कि कैस्पर की आखिरी बार फरवरी 2024 में उसके प्राथमिक चिकित्सक ने जांच की थी। डॉक्टर ने उसे तुरंत बाल एंडोक्रिनोलॉजिस्ट (Pediatric Endocrinologist) के पास भेजने की सलाह दी थी, लेकिन उसके माता-पिता उसे कभी विशेषज्ञ के पास नहीं ले गए।
क्या-क्या आरोप लगे हैं?
- माता-पिता ने बच्चे को नियमित चिकित्सा सुविधा नहीं दिलाई।
- उसे सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण उपलब्ध नहीं कराया।
- बच्चा चार अन्य परिवार के सदस्यों के साथ एक अस्थायी बिस्तर पर सोता था।
- उसकी भोजन की आदतें बेहद खराब थीं और उसका मुख्य आहार केवल आलू के चिप्स और फ्रेंच फ्राइज था।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया कि बच्चे को भोजन की बनावट (Texture Issues) के कारण सीमित प्रकार का खाना दिया जाता था, लेकिन उसके लिए उचित चिकित्सकीय या पोषण संबंधी उपचार नहीं कराया गया।अभियोजन पक्ष के David Leyton ने कहा कि यह केवल लापरवाही का मामला नहीं था, बल्कि बच्चे की लगातार उपेक्षा की गई। उन्होंने बताया कि परिवार आर्थिक रूप से सक्षम था। पिता के पास स्थायी नौकरी और पूरे परिवार के लिए स्वास्थ्य बीमा भी था, लेकिन इसके बावजूद बच्चे को आवश्यक इलाज नहीं मिला। यह मामला इसलिए गंभीर माना जा रहा है क्योंकि जांच एजेंसियों का आरोप है कि बच्चे की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति लंबे समय से स्पष्ट थी, लेकिन माता-पिता ने चिकित्सकीय सलाह की अनदेखी की। अभियोजन पक्ष का दावा है कि समय पर उपचार कराया जाता तो बच्चे की जान बचाई जा सकती थी।