Edited By SHUKDEV PRASAD,Updated: 03 Mar, 2026 09:52 PM

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के खिलाफ ‘Operation Epic Fury’ नाम से सैन्य अभियान शुरू करने की घोषणा की।
इंटरनेशनल डेस्क: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के खिलाफ ‘Operation Epic Fury’ नाम से सैन्य अभियान शुरू करने की घोषणा की। इस संयुक्त कार्रवाई में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आई हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस सैन्य अभियान के बाद मिडिल ईस्ट में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। ईरान की ओर से जवाबी कदम उठाए जाने की आशंका जताई जा रही है, जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता और बढ़ सकती है। अमेरिकी प्रशासन का अनुमान है कि यह संघर्ष कई हफ्तों तक चल सकता है।
$210 बिलियन तक का संभावित आर्थिक असर
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सैन्य अभियान लंबा खिंचता है तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ पड़ सकता है। पेन व्हार्टन बजट मॉडल के विश्लेषण के अनुसार, कुल आर्थिक प्रभाव $50 बिलियन से लेकर $210 बिलियन तक पहुंच सकता है। इसमें प्रत्यक्ष सैन्य खर्च, हथियारों और उपकरणों की पुनःपूर्ति, लॉजिस्टिक्स और ऑपरेशन से जुड़े खर्च शामिल हैं। इसके अलावा ऊर्जा बाजार में अस्थिरता, वैश्विक व्यापार पर असर और निवेशकों की अनिश्चितता से व्यापक आर्थिक नुकसान का अनुमान लगाया गया है।
तेल बाजार में उथल-पुथल
तनाव बढ़ने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे रणनीतिक समुद्री मार्ग प्रभावित होते हैं तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। इसका सीधा प्रभाव अमेरिका सहित कई देशों में महंगाई और जीवनयापन की लागत पर पड़ेगा। ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी से अमेरिकी उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है, खासकर ऐसे समय में जब महंगाई पहले से ही एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है।
उन्नत सैन्य संसाधनों की तैनाती
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस ऑपरेशन में अत्याधुनिक लड़ाकू विमान, स्टेल्थ बॉम्बर्स, ड्रोन, एयरक्राफ्ट कैरियर और मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैनात किए गए हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर सैन्य संसाधनों का इस्तेमाल लागत को और बढ़ा सकता है। यदि जमीनी सैनिकों की तैनाती का फैसला लिया जाता है तो खर्च का दायरा और विस्तृत हो सकता है।
घरेलू राजनीति पर असर
अमेरिका में इस सैन्य कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। कुछ सर्वेक्षणों में सीमित जनसमर्थन सामने आने की बात कही गई है। बढ़ती महंगाई और आर्थिक दबाव के बीच युद्ध खर्च को लेकर सरकार पर सवाल उठ रहे हैं।
मिडिल ईस्ट में जारी यह टकराव केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और घरेलू राजनीति तक महसूस किया जा रहा है। आने वाले हफ्ते यह तय करेंगे कि यह संघर्ष कितनी दूर तक जाता है और इसकी अंतिम आर्थिक कीमत कितनी भारी साबित होती है।