Ayatollah Khamenei funeral: मौत फरवरी में, अंतिम संस्कार जुलाई में, जानिए इतने महीनों तक कहाँ और कैसे सुरक्षित रखा गया खामेनेई का शव?

Edited By Updated: 04 Jul, 2026 12:44 PM

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ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का 4 महीने के बाद अंतिम संस्कार होने वाला है। उनकी मौत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों में हुई थी। आमतौर पर इस्लामिक परंपराओं में शव को जल्द से जल्द दफनाने का नियम है, इसलिए 4 महीने की यह...

इंटरनेशनल डेस्क: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का 4 महीने के बाद अंतिम संस्कार होने वाला है। उनकी मौत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों में हुई थी। आमतौर पर इस्लामिक परंपराओं में शव को जल्द से जल्द दफनाने का नियम है, इसलिए 4 महीने की यह देरी पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बनी हुई है।

युद्ध के कारण टला था अंतिम संस्कार

खामेनेई की मौत के बाद ईरान में कई तरह की अफवाहें उड़ रही थीं। ऐसा कहा जा रहा था कि चुपचाप उनके शव को दफन कर दिया गया है। इसे लेकर ईरान के प्रशासन ने साफ किया है कि वहां पर चल रहे भीषण युद्ध के कारण अंतिम संस्कार को कुछ समय के लिए टाला गया था। अब जब ईरान और अमेरिका के बीच एक अस्थायी युद्धविराम (Ceasefire) हुआ है, तब इस भव्य राजकीय विदाई की तैयारी की गई है।

कैसे सुरक्षित रखा गया था शव?

इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार शव पर केमिकल या रासायनिक लेप नहीं लगा सकते। आतंकवाद विरोधी विशेषज्ञ डॉ. मोहम्मद उमर के मुताबिक, खामेनेई के पार्थिव शरीर को इतने महीनों तक डीप फ्रीजर (कोल्ड स्टोरेज) में रखा गया था। शिया इस्लामिक कानूनों के तहत विशेष और असाधारण परिस्थितियों में शव को दफनाने में देरी करने और उसे ठंडक में सुरक्षित रखने की छूट दी जा सकती है, जो सर्वोच्च नेता के मामले में धर्मगुरुओं द्वारा दी गई थी।

अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा जनसैलाब

खामेनेई को अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए ईरान सरकार ने दुनिया से तकरीबन 100 देशों के प्रतिनिधियों को बुलाया था। इसके अलावा आम जनता के लिए भी सुबह से दरवाजे खोल दिए गए हैं। ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि उनके अंतिम संस्कार में तरकरीबन 2 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं। पहले 3 दिनों तक उनके पार्थिव शरीर को तेहरान की प्रसिद्ध ग्रैंड मोसल्ला मस्जिद में रखा जाएगा। इसके बाद उनके जनाजे को इराक के पवित्र शहरों नजफ और कर्बला ले जाया जाएगा। 9 जुलाई को उनके जन्मस्थल मशहद में पूरे राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक (दफनाया) किया जाएगा।       

 

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