ब्रिटेन भी भीषण गर्मी से बेहालः 40°C में ही यहां पिघलने लगी सड़कें, भारत के रोड 50°C में भी सुरक्षित क्यो?(Video)

Edited By Updated: 30 Jun, 2026 01:04 PM

uk roads melt in humid weather while indian roads survive 45 c and beyond

ब्रिटेन में 40°C के आसपास सड़कें नरम पड़ने लगती हैं, जबकि भारत में 45°C से अधिक तापमान में भी सड़कें सामान्य रहती हैं। इसकी वजह निर्माण की गुणवत्ता नहीं, बल्कि दोनों देशों की जलवायु के अनुसार अलग-अलग तरह के बिटुमेन और सड़क निर्माण तकनीक का इस्तेमाल...

London: यूरोप में इस समय भीषण गर्मी पड़ रही है। ब्रिटेन के कई इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया है। इसके कारण कई जगहों पर सड़कें नरम पड़ने लगी हैं। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि भारत में इससे भी ज्यादा गर्मी पड़ती है, फिर यहां सड़कें क्यों नहीं पिघलतीं? असल वजह सड़क निर्माण की गुणवत्ता नहीं, बल्कि दोनों देशों की जलवायु के अनुसार अपनाई गई इंजीनियरिंग है। हर देश अपनी सामान्य जलवायु को ध्यान में रखकर सड़कें बनाता है।

 

ब्रिटेन में सड़कें ऐसे डामर (अस्फाल्ट) से बनाई जाती हैं जिसमें अपेक्षाकृत नरम बिटुमेन का इस्तेमाल होता है। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि वहां लंबे समय तक कड़ाके की ठंड और बर्फबारी होती है। नरम बिटुमेन ठंड में लचीला बना रहता है और सड़क को फटने से बचाता है। लेकिन जब तापमान असामान्य रूप से 40°C तक पहुंच जाता है, तो यही नरम बिटुमेन मुलायम पड़ने लगता है। इसके कारण सड़क की ऊपरी सतह नरम हो जाती है और भारी वाहनों के दबाव से सड़क खराब होने लगती है।वहीं भारत में सड़कें हर साल पड़ने वाली भीषण गर्मी को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं। यहां VG-30 और VG-40 जैसे अधिक कठोर बिटुमेन का इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही बड़े पत्थरों और मजबूत डामर मिश्रण का उपयोग किया जाता है, जिससे सड़कें ज्यादा तापमान और भारी ट्रैफिक दोनों को आसानी से झेल सकें।

 

यही कारण है कि भारत में 45°C या उससे अधिक तापमान होने पर भी अधिकांश सड़कें सामान्य बनी रहती हैं। हालांकि, अगर सड़क की गुणवत्ता खराब हो या निर्माण मानकों का पालन न किया गया हो, तो भारत में भी सड़कें क्षतिग्रस्त हो सकती हैं।निष्कर्ष: ब्रिटेन की सड़कें खराब नहीं हैं और भारत की सड़कें सिर्फ मजबूत होने की वजह से बेहतर नहीं हैं। दोनों देशों की सड़कें अपने-अपने मौसम के अनुसार डिजाइन की जाती हैं। ब्रिटेन की सड़कें ठंड सहने के लिए बनाई जाती हैं, जबकि भारत की सड़कें भीषण गर्मी झेलने के लिए तैयार की जाती हैं।
   

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