'मैं चलता-फिरता मुर्दा हूं': सऊदी की जेल में सड़ रहे कई प्रवासी, हर सुबह रहता मौत का इंतजार

Edited By Updated: 13 Jul, 2026 04:04 PM

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सऊदी अरब की खामिस मुशैत जेल में कई इथियोपियाई प्रवासी ड्रग्स मामलों में मौत की सजा का इंतजार कर रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों ने निष्पक्ष सुनवाई, कानूनी सहायता और प्रवासी कैदियों के साथ व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। सऊदी सरकार की ओर से इन...

International Desk: सऊदी अरब की एक जेल में मौत की सजा का इंतजार कर रहे इथियोपियाई प्रवासियों की स्थिति को लेकर मानवाधिकार संगठनों ने गंभीर चिंता जताई है। एक कैदी ने अपनी पहचान छिपाते हुए बताया कि उसे हर दिन यह डर सताता है कि अगली दस्तक उसकी फांसी का संकेत हो सकती है। CNN की रिपोर्ट के अनुसार, 'अमानुएल' (बदला हुआ नाम) नामक एक इथियोपियाई कैदी कई वर्षों से दक्षिण-पश्चिम सऊदी अरब की खामिस मुशैत जेल में बंद है। उसने कहा, "मैं चलता-फिरता मुर्दा हूं। मेरे दोस्तों को फांसी दिए जाने के बाद मैंने खाना-पीना तक छोड़ दिया है।" उसका कहना है कि सऊदी अरब में फांसी अक्सर बिना किसी पूर्व सूचना के दी जाती है।

 

मानवाधिकार संगठन Reprieve के अनुसार, खामिस मुशैत जेल की एक ही बैरक में करीब 60 इथियोपियाई प्रवासी ड्रग्स से जुड़े मामलों में मौत की सजा का इंतजार कर रहे हैं। अन्य बैरकों में भी कई विदेशी कैदी इसी स्थिति में हैं। Reprieve की मुख्य कार्यकारी अधिकारी माया फोआ ने आरोप लगाया कि सऊदी प्रशासन गरीब और कमजोर प्रवासी मजदूरों को निशाना बना रहा है। उनका कहना है कि कई मामलों में इन लोगों का असली 'अपराध' बेहतर जीवन की तलाश में सीमा पार करना था। रिपोर्ट के मुताबिक, कई परिवारों को अपने रिश्तेदारों की गिरफ्तारी और सजा की जानकारी सरकारी अधिकारियों से नहीं, बल्कि समुदाय के लोगों के जरिए मिली। एक कैदी के परिजन ने सऊदी सरकार से दया की अपील करते हुए कहा कि उनके भाई और अन्य कैदियों की सजा पर पुनर्विचार किया जाए।

 

मानवाधिकार संगठनों द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, 2025 में सऊदी अरब में 356 लोगों को फांसी दी गई, जो हाल के वर्षों में सबसे अधिक संख्या है। इनमें 240 लोगों को ड्रग्स से जुड़े मामलों में सजा दी गई, जिनमें अधिकांश विदेशी नागरिक थे। वहीं, इस वर्ष अब तक ड्रग्स मामलों में 71 लोगों को फांसी दी जा चुकी है, जिनमें सबसे अधिक इथियोपियाई नागरिक बताए गए हैं। यूरोपियन सऊदी ऑर्गेनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स के कानूनी निदेशक और सऊदी मूल के वकील ताहा अल-हज्जी ने दावा किया कि कई मामलों में आरोपियों को उचित कानूनी सहायता और अनुवाद की सुविधा नहीं मिलती। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में स्वीकारोक्ति कथित तौर पर दबाव या यातना के तहत कराई गई।  ये आरोप सीएनएन और मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्टों पर आधारित हैं। सऊदी सरकार की ओर से इन आरोपों पर इस रिपोर्ट में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
 
 

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