'सीमा विवाद से ऊपर रहें रिश्ते', पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच अहम बातचीत... चीनी विदेश मंत्रालय ने जारी किया बयान

Edited By Updated: 31 Aug, 2025 02:41 PM

modi and xi stress ties over border disputes

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तिआनजिन में हुई बैठक में भारत-चीन रिश्तों को नई दिशा देने पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने सीमा विवाद को रिश्तों पर हावी न होने देने पर सहमति जताई। पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देश साझेदार हैं और...

इंटरनेशनल डेस्क: चीन के तिआनजिन शहर में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात हुई। यह मुलाकात लगभग एक घंटे तक चली। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत और चीन के बीच के रिश्तों और सहयोग पर विस्तार से बात की। इस बैठक की जानकारी चीन के विदेश मंत्रालय ने भी दी है। शी जिनपिंग ने कहा कि पिछले साल कजान में हुई बैठक के बाद से भारत-चीन के रिश्तों में बहुत सुधार हुआ है और दोनों देशों का सहयोग बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि ‘ड्रैगन और हाथी’, यानी चीन और भारत, को साथ मिलकर काम करना बहुत जरूरी है। दोनों देश पुरानी सभ्यताएं हैं और उनकी जिम्मेदारी है कि वे अपने लोगों के भले के लिए मिलकर आगे बढ़ें।

‘रिश्तों पर हावी न हो सीमा विवाद’

चीनी विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि शी जिनपिंग ने बताया कि भारत और चीन को अपने रिश्तों को लंबी सोच और योजना के साथ देखना चाहिए। उन्होंने चार बातों पर जोर दिया। पहली, दोनों देश आपस में ज्यादा बात-चीत करके भरोसा बढ़ाएं। दूसरी, मिलकर काम करें और एक-दूसरे को फायदा पहुंचाएं। तीसरी, एक-दूसरे की परेशानियों को समझें और शांति से साथ रहें, साथ ही सीमा के विवाद को रिश्तों पर हावी न होने दें। चौथी, कई देशों के साथ मिलकर काम करके एशिया और पूरी दुनिया में शांति और तरक्की लाएं।

भारत-चीन साझेदारी

पीएम मोदी ने इस बैठक में कहा कि कजान में हुई पिछली मुलाकात ने भारत-चीन रिश्तों का सही रास्ता दिखाया था। अब दोनों देशों के बीच संबंध फिर से अच्छे हुए हैं। उन्होंने बताया कि सीमा अब शांति और स्थिरता की हालत में है और जल्द ही भारत और चीन के बीच सीधे हवाई रास्ते भी फिर से शुरू होंगे। मोदी ने कहा कि भारत और चीन सिर्फ विरोधी नहीं हैं बल्कि दोनों अच्छे साझेदार भी हैं। दोनों देशों में जहां सहमति है वह असहमति से ज्यादा है। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि भारत और चीन मिलकर एशियाई सदी को मजबूत बनाएंगे और दुनिया की बहु-ध्रुवीय व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

शी जिनपिंग ने कहा कि ‘ड्रैगन और हाथी का साथ आना’ दोनों देशों के लिए सही विकल्प है। यह सहयोग न केवल भारत और चीन के लिए बल्कि पूरे एशिया और दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है। दोनों नेताओं ने यह भी सहमति जताई कि उनका फोकस शांति, स्थिरता और विकास पर होगा ताकि दोनों देशों के लोग एक बेहतर भविष्य का हिस्सा बन सकें।

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