जापानी मंत्री पर चीनी मीडिया की नस्लवादी टिप्पणी पर बवाल, टोक्यो ने बीजिंग को भेजा कड़ा संदेश

Edited By Updated: 11 Mar, 2026 06:29 PM

wuc condemns racist attacks on japanese minister by chinese media

वर्ल्ड उइगर कांग्रेस ने जापान की विदेश मामलों की उपमंत्री अरफिया एरी पर चीनी मीडिया की कथित नस्लवादी टिप्पणियों की कड़ी निंदा की है। संगठन ने इसे उइगर समुदाय के खिलाफ भेदभाव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डराने-धमकाने की रणनीति बताया। जापान ने भी चीन के...

International Desk: उइगर अधिकार संगठन World Uyghur Congress (WUC) ने जापान की विदेश मामलों की संसदीय उपमंत्री Arfiya Eri के खिलाफ चीनी मीडिया में प्रकाशित कथित नस्लवादी टिप्पणियों की कड़ी निंदा की है। संगठन का कहना है कि यह घटना उइगर समुदाय के खिलाफ नस्लीय भेदभाव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डराने-धमकाने की कोशिश का उदाहरण है। WUC के अनुसार विवाद 27 फरवरी को तब शुरू हुआ जब चीनी वेबसाइट Sina.com पर प्रकाशित एक रिपोर्ट में अरफिया एरी के जातीय मूल को लेकर कथित अपमानजनक टिप्पणियां की गईं।

 

रिपोर्ट में उन्हें “फ्रंटियर पॉइजन” और “टॉक्सिक” जैसे शब्दों से संबोधित किया गया। बाद में ये टिप्पणियां Global Times से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए TikTok पर भी साझा की गईं, जिससे ऑनलाइन विवाद और बढ़ गया। अरफिया एरी के माता-पिता East Turkistan (शिनजियांग क्षेत्र) से आते हैं। उनका परिवार 1999 में जापानी नागरिक बना था। राजनीति में आने से पहले एरी एक अकादमिक थीं और United Nations में अधिकारी के रूप में भी काम कर चुकी हैं। 2023 में वह Liberal Democratic Party के टिकट पर जापान की संसद के लिए चुनी गईं और उइगर मूल की पहली नेता बनीं जिन्हें किसी राष्ट्रीय संसद में चुना गया। 

 

इस विवाद के बाद Japan सरकार ने China के सामने औपचारिक कूटनीतिक विरोध दर्ज कराया। जापान ने इसे एक लोकतांत्रिक रूप से चुने गए प्रतिनिधि का अभूतपूर्व अपमान बताया। WUC के अध्यक्ष Turgunjan Alawdun ने कहा कि यह घटना दिखाती है कि उइगर समुदाय को किस तरह की अमानवीय भाषा और भेदभाव का सामना करना पड़ता है।उन्होंने कहा कि यह बयानबाजी चीन की कथित ट्रांसनेशनल रिप्रेशन यानी विदेशों में भी उइगर समुदाय को निशाना बनाने की नीति से जुड़ी हुई है। WUC ने जापान के कूटनीतिक कदम का समर्थन करते हुए दुनिया के अन्य देशों से भी अपील की है कि वे नस्लवादी भाषा और भेदभाव के खिलाफ खुलकर आवाज उठाएं।
  

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