Edited By Tanuja,Updated: 04 Mar, 2026 06:57 PM

सूत्रों के अनुसार, ईरान ने घोषणा की है कि वह Strait of Hormuz से केवल चीनी जहाज़ों को गुजरने देगा। यह कदम चीन के समर्थन के प्रति “आभार” बताया जा रहा है। इस फैसले से वैश्विक तेल आपूर्ति और सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ सकता है।
International Desk: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच ईरान ने वैश्विक समुद्री व्यापार के सबसे अहम मार्गों में से एक Strait of Hormuz को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सूत्रों के मुताबिक, अब इस रास्ते से केवल चीनी जहाज़ों को गुजरने की अनुमति दी जाएगी, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में भूचाल आ सकता है। सूत्रों के मुताबिक, यह फैसला चीन के उस रुख के प्रति “आभार” के तौर पर लिया गया है, जिसमें बीजिंग ने अमेरिका और इजरायल के हमलों को अस्वीकार्य बताया था। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने अपने रूसी समकक्ष से बातचीत में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की हत्या को “संप्रभु नेता की खुली हत्या” बताया था। चीन पहले ही तत्काल युद्धविराम और समुद्री मार्गों की सुरक्षा की अपील कर चुका है।
क्यों अहम है हॉर्मुज़?
- यह फारस की खाड़ी को खुले समुद्र से जोड़ता है
- संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे देशों की तेल-गैस निर्यात जीवनरेखा
- दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति इसी मार्ग से गुजरती है
- एशियाई बाजारों, खासकर चीन और भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण
- ईरान द्वारा इस मार्ग को अवरुद्ध करने से वैश्विक सप्लाई चेन में भारी बाधा की आशंका है।
ईरान की Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने कहा है कि उसका स्ट्रेट पर “पूर्ण नियंत्रण” है और बिना अनुमति गुजरने वाले जहाज़ों को मिसाइल या ड्रोन हमले का खतरा होगा।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रतिबंध लंबा चला, तो दुनिया एक बड़े ऊर्जा संकट की ओर बढ़ सकती है।
वैश्विक असर
- तेल कीमतों में तेज उछाल संभव
- एशिया और यूरोप की ऊर्जा सुरक्षा पर खतरा
- वैश्विक बाजारों में अस्थिरता
- समुद्री बीमा और शिपिंग लागत में भारी वृद्धि