16 दिनों में 20 हजार से ज्यादा मौतें, फ्रांस में भीषण गर्मी ने मचाई तबाही

Edited By Updated: 23 Jul, 2026 06:41 PM

more than 20 thousand deaths in 16 days severe heat caused havoc in france

फ्रांस से सामने आए नए आंकड़ों ने 2026 की भीषण हीटवेव की गंभीरता को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। जून के आखिर और जुलाई की शुरुआत के बीच महज 16 दिनों में देश में 20 हजार से ज्यादा लोगों की मौत दर्ज की गई। यह संख्या सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक है।...

नेशनल डेस्क : फ्रांस से सामने आए नए आंकड़ों ने 2026 की भीषण हीटवेव की गंभीरता को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। जून के आखिर और जुलाई की शुरुआत के बीच महज 16 दिनों में देश में 20 हजार से ज्यादा लोगों की मौत दर्ज की गई। यह संख्या सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक है। हालांकि, सवाल यह है कि क्या इन सभी मौतों के पीछे सिर्फ गर्मी जिम्मेदार थी?

फ्रांस की पब्लिक हेल्थ एजेंसी के अनुसार, 17 जून से 2 जुलाई के बीच देश में 21,674 लोगों की मौत हुई, जबकि इसी अवधि में सामान्य तौर पर करीब 15,910 मौतें होती हैं। यानी इस बार 5,764 अतिरिक्त मौतें दर्ज की गईं, जो सामान्य से लगभग 36 प्रतिशत अधिक हैं।

स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि इन सभी मौतों का कारण सीधे तौर पर हीटवेव नहीं था। लेकिन अत्यधिक तापमान ने पहले से बीमार लोगों की स्थिति को गंभीर बना दिया, जिससे मौतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ गया। शुरुआती अनुमान में असर कम माना गया था, लेकिन बाद में मिले आंकड़ों ने तस्वीर कहीं ज्यादा चिंताजनक दिखाई।

आखिर 'अतिरिक्त मौतें' क्या होती हैं?

किसी आपदा या असामान्य घटना का वास्तविक असर समझने के लिए स्वास्थ्य एजेंसियां 'अतिरिक्त मौतों' (Excess Deaths) का आंकड़ा देखती हैं। इसमें किसी खास अवधि के दौरान हुई कुल मौतों की तुलना सामान्य परिस्थितियों में होने वाली औसत मौतों से की जाती है। इसी आधार पर फ्रांस में इस अवधि के दौरान हजारों अतिरिक्त मौतें दर्ज की गईं।

सबसे ज्यादा खतरा बुजुर्गों पर

रिपोर्ट के मुताबिक, अतिरिक्त मौतों में करीब दो-तिहाई लोग 75 वर्ष या उससे अधिक उम्र के थे। विशेषज्ञों का कहना है कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर की तापमान नियंत्रित करने की क्षमता कमजोर पड़ जाती है, जिससे तेज गर्मी जानलेवा साबित हो सकती है।

इन मौतों में करीब आधी अस्पतालों में हुईं, जबकि बड़ी संख्या में लोगों की मौत नर्सिंग होम और घरों में भी दर्ज की गई। पेरिस और उसके आसपास के इलाकों में सबसे ज्यादा असर देखा गया, जहां करीब 2,000 अतिरिक्त मौतें हुईं।

शरीर पर कैसे असर डालती है भीषण गर्मी?

लगातार बढ़ा तापमान शरीर पर अतिरिक्त दबाव डालता है। इससे डिहाइड्रेशन, दिल, फेफड़ों और किडनी से जुड़ी समस्याएं गंभीर हो सकती हैं। जिन लोगों को पहले से कोई बीमारी होती है, उनके लिए हीटवेव का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यही वजह है कि गर्मी का असर सिर्फ तापमान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि अस्पतालों में मरीजों की संख्या और मौतों के आंकड़ों में भी साफ दिखाई देता है।

क्लाइमेट चेंज से बढ़ रहा खतरा

वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से यूरोप में हीटवेव पहले की तुलना में ज्यादा बार और ज्यादा लंबे समय तक रहने लगी हैं। साल 2003 में यूरोप में आई भीषण गर्मी के दौरान 70 हजार से अधिक लोगों की मौत होने का अनुमान लगाया गया था। अब 2026 की यह हीटवेव एक बार फिर संकेत दे रही है कि बढ़ती गर्मी केवल मौसम की चुनौती नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ऐसे हालात से निपटने के लिए समय पर अलर्ट, बेहतर स्वास्थ्य तैयारियां और लोगों में जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी होगा।

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