Edited By Niyati Bhandari,Updated: 31 Aug, 2026 07:08 AM

Bahula Chauth vrat Katha: सनातन धर्म में आस्था, समर्पण और वात्सल्य के कई रूप देखने को मिलते हैं लेकिन मातृत्व और सत्यनिष्ठा की जो बेमिसाल मिसाल बहुला चौथ की कथा में मिलती है, वह अद्भुत है। भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाने वाला यह...
Bahula Chauth vrat Katha: सनातन धर्म में आस्था, समर्पण और वात्सल्य के कई रूप देखने को मिलते हैं लेकिन मातृत्व और सत्यनिष्ठा की जो बेमिसाल मिसाल बहुला चौथ की कथा में मिलती है, वह अद्भुत है। भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाने वाला यह पर्व केवल एक व्रत नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण और उनकी परम प्रिय कामधेनु गाय 'बहुला' के बीच हुए एक ऐसे मार्मिक संवाद की गाथा है, जिसने कालचक्र को भी थाम दिया था।
जब अपनी प्रिय गैया की परीक्षा लेने के लिए स्वयं द्वारकाधीश ने एक भयानक शेर का रूप धर लिया, तब वन के सन्नाटे में मौत को सामने देखकर भी बहुला डगमगाई नहीं। उसके मन में अपनी जान बचाने से बड़ा संकल्प अपने भूखे बछड़े का पेट भरने और अपने दिए वचन को निभाने का था। कामधेनु बहुला के उस निश्छल वात्सल्य और अटूट सत्य की अमर कहानी, जिसके आगे स्वयं भगवान को भी नतमस्तक होना पड़ा और क्यों आज के दिन बछड़ों के हक के लिए गाय का दूध दुहना वर्जित माना जाता है।
Story of Bahula Chauth बहुला चौथ की कथा
किवंदतियों के अनुसार श्री कृष्ण की गौशाला में एक बहुला नामक कामधेनु गाय थी। ये गाय श्री कृष्ण को बहुत प्रिय थी। एक बार उन्होंने बहुला की परीक्षा लेने के बारे में सोचा। बहुला वन में घास चरने गई। तभी श्री कृष्ण शेर का रूप बदलकर कामधेनु गाय के पास गए और उसके ऊपर हमला बोल दिया। शेर को देखकर गाय बहुत परेशान हो गई। अपनी जान बचाने के लिए वो शेर से प्रार्थना करने लगी लेकिन उस शेर ने बहुला की एक न सुनी।
फिर बहुला ने कहा कि मेरा बछड़ा भूखा होगा, उसको दूध पिला कर कल में फिर आपके पास वापिस आ जाऊंगी, तब आप मेरा शिकार कर लेना। अपने बच्चे के प्रति प्रेम देखकर शेर के मन में दया आ गई और उसे जाने की आज्ञा दे दी। अगले दिन अपने वादे को पूरा करते हुए बहुला शेर के पास वापिस आ गई। शेर के रूप में श्री कृष्ण उसकी वचन बद्धता को देखकर बहुत प्रसन्न हुए और कहा कि कलियुग में तुम्हारी भाद्र मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को पूजा होगी। इस पूजा को करने के बाद महिलाओं को संतान सुख की प्राप्ति होगी। इसी वजह से आज के दिन बहुत से ग्वाले अपनी गाय का दूध नहीं निकालते और उसे बछड़े के लिए छोड़ देते हैं।
