Edited By Tanuja,Updated: 22 Sep, 2026 04:21 PM

ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप और डेनमार्क के बीच 2019 से जारी तनाव ने 2026 में नया मोड़ लिया है। ग्रीनलैंड खरीदने और सैन्य नियंत्रण की मांग से शुरू हुआ विवाद अब अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने वाले समझौते तक पहुंचा है। डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने संप्रभुता तथा...
Washington: ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की महत्वाकांक्षा ने 2019 से अमेरिका और उसके नाटो सहयोगी डेनमार्क के बीच लगातार तनाव पैदा किया। कभी ट्रंप ने ग्रीनलैंड को खरीदने की इच्छा जताई, फिर पूरे द्वीप पर अमेरिकी नियंत्रण की बात की और सैन्य विकल्प से भी इनकार नहीं किया। अब सितंबर 2026 में विवाद ने नया मोड़ लिया है। अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने को लेकर समझौता सामने आया है, जबकि डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने संप्रभुता कायम रहने पर जोर दिया है।अगस्त 2019 में अपने पहले कार्यकाल के दौरान ट्रंप ने अमेरिका के लिए ग्रीनलैंड खरीदने में रुचि दिखाई थी। डेनमार्क की तत्कालीन प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने इस विचार को खारिज कर दिया था। इसके बाद ट्रंप ने डेनमार्क की अपनी प्रस्तावित यात्रा रद्द कर दी। दिसंबर 2024 में दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से पहले ट्रंप ने कहा कि ग्रीनलैंड का स्वामित्व और नियंत्रण अमेरिका के लिए बेहद जरूरी है।
ग्रीनलैंड के तत्कालीन प्रधानमंत्री म्यूट बोरोप एगेडे ने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड बिक्री के लिए नहीं है। जनवरी 2025 में ट्रंप के बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर ने ग्रीनलैंड का दौरा किया। इसी दौरान ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर नियंत्रण हासिल करने के लिए सैन्य बल के इस्तेमाल की संभावना से इनकार नहीं किया।मार्च 2025 में ग्रीनलैंड में चुनाव हुए और जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन की डेमोक्राटिट पार्टी सबसे आगे रही। इसके बाद ग्रीनलैंड की संसद में मौजूद सभी प्रमुख दलों ने अमेरिकी नियंत्रण के विचार का विरोध किया। 28 मार्च को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ग्रीनलैंड के पिटुफिक अंतरिक्ष अड्डे का दौरा किया और डेनमार्क पर द्वीप की सुरक्षा में पर्याप्त निवेश नहीं करने का आरोप लगाया। ट्रंप ने भी सैन्य विकल्प खुला रखने की बात दोहराई। अगस्त 2025 में डेनमार्क ने एक अमेरिकी राजनयिक को तलब किया। यह कदम ग्रीनलैंड में ट्रंप से जुड़े लोगों के कथित गुप्त प्रभाव अभियान की रिपोर्ट के बाद उठाया गया था।
दिसंबर 2025 में ट्रंप ने लुइसियाना के गवर्नर जेफ लैंड्री को ग्रीनलैंड के लिए विशेष दूत नियुक्त किया। लैंड्री ने ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाने के लिए काम करने की बात कही। डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने इसके बाद अमेरिकी कब्जे की संभावना को खारिज किया। जनवरी 2026 में यह विवाद और गहरा गया। डेनमार्क की प्रधानमंत्री फ्रेडरिक्सन ने संभावित अमेरिकी सैन्य कब्जे को नाटो के लिए गंभीर संकट बताया। यूरोपीय नेताओं ने ग्रीनलैंड की संप्रभुता का समर्थन किया। ट्रंप ने इसके जवाब में सैन्य विकल्प खुला रखने की बात दोहराई।जनवरी 2026 में ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण का समर्थन नहीं करने वाले यूरोपीय देशों पर शुल्क लगाने की चेतावनी दी और आठ यूरोपीय देशों पर प्रस्तावित 10 प्रतिशत शुल्क की घोषणा की। कुछ दिन बाद उन्होंने प्रस्तावित शुल्क वापस ले लिया और नाटो महासचिव मार्क रूटे के साथ आर्कटिक सुरक्षा पर भविष्य के समझौते की रूपरेखा पर सहमति की बात कही। इसके बाद अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच आर्कटिक सुरक्षा को लेकर तकनीकी बातचीत शुरू हुई।
18 सितंबर 2026 को ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच ऐसा समझौता हुआ है जिससे ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ाई जाएगी। समझौते में अमेरिका के विरोधी देशों को ग्रीनलैंड में सैन्य अड्डे स्थापित करने या कुछ संवेदनशील निवेश करने से रोकने की व्यवस्था की बात सामने आई है। हालांकि, यह समझौता ग्रीनलैंड की संप्रभुता अमेरिका को हस्तांतरित नहीं करता। डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने कहा है कि उनकी संप्रभुता और ग्रीनलैंड के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार को मान्यता दी गई है। ट्रंप ने समझौते को अमेरिकी सुरक्षा जरूरतों के लिए स्थायी अधिकारों के रूप में पेश किया है, लेकिन डेनमार्क ने उनकी इस व्याख्या की पुष्टि उसी रूप में नहीं की है।ताजा रिपोर्टों के अनुसार, समझौते के तहत अमेरिका ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य मौजूदगी का विस्तार कर सकता है। रॉयटर्स के मुताबिक, दक्षिणी ग्रीनलैंड के नार्सार्सुआक में शीतयुद्ध के दौर के एक पुराने अमेरिकी सैन्य अड्डे को फिर सक्रिय करने और पूर्वी ग्रीनलैंड के मेस्टरस्विग में नया सैन्य अड्डा स्थापित करने की योजना है।