Edited By Parveen Kumar,Updated: 06 Mar, 2026 05:56 PM

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के बीच भी दरार की खबरें सामने आ रही हैं। फारस की खाड़ी के कुछ देशों ने आरोप लगाया है कि उन्हें अमेरिका और इज़राइल की ओर से ईरान पर किए गए हमलों की पहले से कोई जानकारी नहीं दी गई।
इंटरनेशनल डेस्क : मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के बीच भी दरार की खबरें सामने आ रही हैं। फारस की खाड़ी के कुछ देशों ने आरोप लगाया है कि उन्हें अमेरिका और इज़राइल की ओर से ईरान पर किए गए हमलों की पहले से कोई जानकारी नहीं दी गई। दो खाड़ी देशों के अधिकारियों ने कहा कि उनकी सरकारें अमेरिका के युद्ध संभालने के तरीके से बेहद निराश हैं। उनका कहना है कि पिछले शनिवार को ईरान पर हुए शुरुआती हमले से पहले उन्हें सतर्क नहीं किया गया, जबकि उन्होंने पहले ही चेतावनी दी थी कि इस संघर्ष के पूरे क्षेत्र पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
“हमें अपने हाल पर छोड़ दिया गया”
एक अधिकारी ने कहा कि खाड़ी देशों में यह धारणा बन रही है कि अमेरिकी सैन्य अभियान का मुख्य उद्देश्य इज़राइल और अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा रहा है, जबकि क्षेत्रीय सहयोगियों को खुद को बचाने के लिए छोड़ दिया गया। उनका दावा है कि ईरान के लगातार ड्रोन और मिसाइल हमलों के कारण उनके एयर डिफेंस सिस्टम के इंटरसेप्टर तेजी से खत्म हो रहे हैं। हालांकि सऊदी अरब, कुवैत और बहरीन की सरकारों ने इस मुद्दे पर आधिकारिक प्रतिक्रिया देने से फिलहाल परहेज किया है।
ट्रंप प्रशासन का बचाव
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एना केली ने इन आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि अमेरिकी ऑपरेशन “एपिक फ्यूरी” के कारण ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल हमलों में करीब 90 प्रतिशत की कमी आई है। उनका कहना है कि इस अभियान ने ईरान की हथियार बनाने और लॉन्च करने की क्षमता को कमजोर किया है। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप क्षेत्रीय साझेदारों के साथ लगातार संपर्क में हैं और ईरानी सरकार के हमले यह साबित करते हैं कि इस खतरे को खत्म करना कितना जरूरी था।
ड्रोन हमलों से बढ़ी चिंता
युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने खाड़ी के पांच देशों को निशाना बनाकर कम से कम 380 मिसाइलें और 1,480 से ज्यादा ड्रोन दागे हैं। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक इन हमलों में कम से कम 13 लोगों की मौत हो चुकी है। हाल ही में कुवैत में एक ईरानी ड्रोन हमले में छह अमेरिकी सैनिक भी मारे गए, जब एक सिविलियन पोर्ट के ऑपरेशन सेंटर को निशाना बनाया गया। पेंटागन अधिकारियों ने कांग्रेस को दी गई एक ब्रीफिंग में माना कि आने वाले कई ड्रोन, खासकर शाहेद यूएवी, को रोक पाना मुश्किल साबित हो सकता है, जिससे क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और सहयोगी देशों की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है।