Edited By Tanuja,Updated: 08 Apr, 2026 12:27 PM

ईरान में युद्धविराम के बाद भी गुस्सा फूटा। Donald Trump और इज़राइल के खिलाफ प्रदर्शन हुए, जहां लोगों ने नारे लगाए और झंडे जलाए। यह दिखाता है कि सीजफायर के बावजूद कट्टरपंथियों में आक्रोश बना हुआ है और शांति प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण है।
International Desk: ईरान की राजधानी Tehran में युद्धविराम के ऐलान के तुरंत बाद ही सरकार समर्थक प्रदर्शनकारियों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए और अमेरिका व इज़राइल के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने “डेथ टू अमेरिका” और “डेथ टू इज़राइल” जैसे नारे लगाए। हालात इतने उग्र हो गए कि आयोजकों को भीड़ को शांत कराने की कोशिश करनी पड़ी, लेकिन लोग लगातार विरोध करते रहे।
🚨 Protesters burn U.S. and Israeli flags in Tehran as a ceasefire is announced. pic.twitter.com/Ans9kyW5Xy
— Global News & Geopolitics 🌍 (@GlobalNewsGeo) April 8, 2026
गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर अमेरिकी और इज़राइली झंडे जलाए। यह विरोध खास तौर पर उन कट्टरपंथी समूहों का माना जा रहा है, जो इस युद्ध को निर्णायक लड़ाई के रूप में देख रहे थे और समझौते के खिलाफ हैं। हालांकि Donald Trump ने ईरान पर हमले रोकने और दो हफ्ते के युद्धविराम का ऐलान किया है, लेकिन जमीनी हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। सीजफायर के बावजूद इज़राइल और खाड़ी देशों में मिसाइल अलर्ट जारी होने की खबरें भी सामने आई हैं, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई है।
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— Punjab Kesari (@punjabkesari) April 8, 2026
ईरान में हुए ये प्रदर्शन दिखाते हैं कि राजनीतिक समझौते के बावजूद जनता के एक वर्ग में गुस्सा अभी भी उबाल पर है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि क्या यह युद्धविराम स्थायी शांति में बदल पाएगा या फिर हालात दोबारा बिगड़ेंगे।इस समझौते में Shehbaz Sharif और सेना प्रमुख Asim Munir की मध्यस्थता अहम रही। अब 10 अप्रैल को Islamabad में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत होनी है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह बिना शर्त युद्ध खत्म नहीं करेगा। Strait of Hormuz को लेकर भी दुनिया की चिंता बनी हुई है, क्योंकि यह वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम मार्ग है। यहां किसी भी तरह का तनाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।