Edited By Tanuja,Updated: 25 Aug, 2026 05:59 PM
पाकिस्तान में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा पर नए मामले गंभीर सवाल उठा रहे हैं। 18 महीने की अइज़ल की मौत, पांच वर्षीय आयत नूर के लापता होने और हिना जावेद की मौत के बीच साहिल की रिपोर्ट में 2026 के पहले छह महीनों में जेंडर हिंसा के 3,172 मामले दर्ज...
Islamabad: पाकिस्तान में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ हिंसा के हालिया मामलों ने सुरक्षा व्यवस्था और कानून लागू करने वाली एजेंसियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।‘द फ्राइडे टाइम्स’ की एक रिपोर्ट में 18 महीने की अइज़ल, पांच वर्षीय आयत नूर और हिना जावेद के मामलों का जिक्र करते हुए कहा गया है कि इन तीनों घटनाओं की परिस्थितियां अलग हैं, लेकिन सभी मामले महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े गंभीर खतरे को सामने लाते हैं।
18 महीने की मासूम की मौत
कराची में 18 महीने की अइज़ल की कथित यौन हिंसा के बाद मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, एक किशोर रिश्तेदार कथित तौर पर बच्ची को उसके घर से ले गया था। बाद में बच्ची को गंभीर हालत में परिवार के पास वापस लाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, मेडिकल रिपोर्ट कथित यौन हिंसा के अनुरूप थी। मामले में संदिग्ध को बाद में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। यह मामला इस सवाल को और गंभीर बनाता है कि छोटे बच्चों को उनके परिचित लोगों से संभावित खतरे से बचाने के लिए परिवार और प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
पांच साल की आयत नूर अब भी लापता
हरिपुर में पांच वर्षीय आयत नूर के लापता होने का मामला भी चिंता बढ़ा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, आयत 10 अगस्त को लापता हुई थी। हरिपुर के अलग-अलग इलाकों से एक सप्ताह के भीतर तीन बच्चों के लापता होने की सूचना सामने आई, लेकिन पुलिस अब तक उनका पता नहीं लगा सकी है। एक छोटे बच्चे के लापता होने का मामला पुलिस और बाल संरक्षण व्यवस्था के लिए बेहद गंभीर चुनौती है
घरेलू हिंसा पर सवाल
रावलपिंडी में हिना जावेद अपने अपार्टमेंट के बाथरूम में मृत मिलीं। रिपोर्ट के मुताबिक, उनके हाथ कथित तौर पर बंधे हुए थे, मुंह पर कपड़ा था और गर्दन पर तार लिपटा हुआ था। हिना के भाई ने दावा किया कि वह पहले अपने पति द्वारा शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना की शिकायत परिवार से कर चुकी थीं। इस मामले ने एक अहम सवाल खड़ा किया है। अगर घरेलू हिंसा की शिकायत पहले ही सामने आ जाए, तो हत्या या गंभीर अपराध होने से पहले प्रशासन पीड़ित महिला की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाता है?
छह महीने में 3,172 मामले
पाकिस्तान में महिलाओं और अन्य लैंगिक समूहों के खिलाफ हिंसा को लेकर एनजीओ साहिल की ‘सिक्स मंथ्स क्रुएल नंबर्स रिपोर्ट’ ने भी चिंताजनक तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 के पहले छह महीनों में पाकिस्तान में जेंडर आधारित हिंसा के 3,172 मामले दर्ज किए गए। इनमें ट्रांसजेंडर लोगों से जुड़े 18 मामले भी शामिल थे। इन मामलों में शामिल थे:
- 644 हत्या
- 514 यातना के मामले
- 462 अपहरण
- 363 आत्महत्या
- 280 बलात्कार
- 175 चोट के मामले
- 132 ऑनर किलिंग
- 21 अन्य अपराध, जिनमें उत्पीड़न, सामूहिक बलात्कार और अश्लील सामग्री से जुड़े मामले शामिल हैं
ये आंकड़े पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों से प्रकाशित राष्ट्रीय और क्षेत्रीय समाचार पत्रों में सामने आई घटनाओं के आधार पर तैयार किए गए थे।
युवतियां भी बड़ी संख्या में पीड़ित
- रिपोर्ट के अनुसार, जिन पीड़ितों की उम्र उपलब्ध थी, उनमें 334 लोग 21 से 30 वर्ष के बीच थे।
- वहीं 306 पीड़ित 11 से 20 वर्ष की उम्र के थे और 120 पीड़ित 31 से 40 वर्ष के थे।
- हालांकि, एक बड़ी समस्या यह भी है कि 71 प्रतिशत मामलों में पीड़ितों की उम्र दर्ज नहीं की गई थी।
अपराधी अक्सर पीड़ित के परिचित
रिपोर्ट में अपराधियों के पीड़ितों से संबंध को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है। आंकड़ों के मुताबिक, 27 प्रतिशत मामलों में आरोपी पीड़ितों के परिचित थे, जबकि 24 प्रतिशत मामलों में आरोपी अजनबी थे। करीब 13 प्रतिशत मामलों में आरोपी पति थे। वहीं 20 प्रतिशत मामलों में अपराधी के बारे में जानकारी उपलब्ध नहीं थी। यह आंकड़ा इस बात की ओर भी इशारा करता है कि महिलाओं और बच्चियों के लिए खतरा कई बार किसी अजनबी से नहीं, बल्कि उनके परिचित लोगों के बीच से भी पैदा होता है। रिपोर्ट का एक और चिंताजनक पहलू घटनाओं की जगह से जुड़ा है। 54 प्रतिशत मामले पीड़ितों के अपने घरों में हुए। वहीं 12 प्रतिशत घटनाएं कथित अपराधियों के घरों में हुईं। इससे घरेलू हिंसा और परिवार के भीतर होने वाले अपराधों को रोकने की चुनौती और गंभीर हो जाती है।
पंजाब में सबसे ज्यादा मामले
क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार, कुल मामलों में से 74 प्रतिशत पंजाब से सामने आए। इसके बाद 17 प्रतिशत मामले सिंध, जबकि 6 प्रतिशत खैबर पख्तूनख्वा से थे।बलूचिस्तान, इस्लामाबाद कैपिटल टेरिटरी, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान से कुल मिलाकर करीब 3 प्रतिशत मामले दर्ज किए गए। रिपोर्ट के अनुसार, 76 प्रतिशत मामलों में पुलिस के पास शिकायत दर्ज की गई थी। करीब 23 प्रतिशत मामलों में शिकायत दर्ज होने की स्थिति का उल्लेख नहीं था, जबकि एक प्रतिशत मामले पुलिस में दर्ज नहीं किए गए थे। यहां बड़ा सवाल सिर्फ शिकायत दर्ज करने का नहीं, बल्कि उसके बाद जांच, गिरफ्तारी, पीड़ित की सुरक्षा और न्यायिक कार्रवाई को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने का भी है। रिपोर्ट में यह भी याद दिलाया गया है कि पाकिस्तान CEDAW, बाल अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन (CRC), ICCPR और Convention Against Torture (CAT) जैसी अंतरराष्ट्रीय संधियों का पक्षकार है।