अमरावती में बनेगा भारत का पहला Quantum-AI यूनिवर्सिटी कैंपस, ₹730 करोड़ का निवेश, चंद्रबाबू नायडू का बड़ा ऐलान

Edited By Updated: 28 Aug, 2026 05:00 PM

amaravati will become a new technology hub

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईईएलआईटी) द्वारा अमरावती में भारत का पहला समर्पित क्वांटम और कृत्रिम मेधा (एआई) विश्वविद्यालय परिसर स्थापित करने की मंजूरी दे दी है ...

अमरावती : आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईईएलआईटी) द्वारा अमरावती में भारत का पहला समर्पित क्वांटम और कृत्रिम मेधा (एआई) विश्वविद्यालय परिसर स्थापित करने की मंजूरी दे दी है। यह निर्णय मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित राजधानी क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण की बैठक में लिया गया। एनआईईएलआईटी विश्वविद्यालय का संचालन भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा किया जाता है।

बृहस्पतिवार को जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में नायडू ने कहा, ''हमने भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन एनआईईएलआईटी की ओर से अमरावती में भारत का पहला समर्पित क्वांटम और एआई विश्वविद्यालय परिसर स्थापित करने की मंजूरी दी है।'' यह परिसर 8.5 एकड़ भूमि पर स्थापित किया जाएगा, जिसमें पांच वर्षों में 730.7 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है। इस राशि को इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के माध्यम से भारत सरकार के सहायता अनुदान द्वारा पूरी तरह से वित्त पोषित करने का प्रस्ताव है। यह संस्थान क्वांटम प्रौद्योगिकियों, एआई, सेमीकंडक्टर और अन्य उभरते हुए प्रौद्योगिकी क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगा, जिसमें शिक्षा, अनुसंधान, कौशल विकास, नवाचार और उद्यमिता का समावेश होगा।

अमरावती में स्थायी परिसर का निर्माण पूरा होने तक शैक्षणिक और उन्नत प्रौद्योगिकी कौशल विकास कार्यक्रम सितंबर 2026 से गुंटूर स्थित आचार्य नागार्जुन विश्वविद्यालय के एक अस्थायी परिसर में शुरू होंगे। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस परियोजना के माध्यम से पांच वर्षों में लगभग 8,250 शिक्षार्थियों को प्रशिक्षित होने का अनुमान है जिनमें 1,650 औपचारिक डिग्री कार्यक्रमों के माध्यम से और 6,600 कौशल तथा प्रमाणनकार्यक्रमों के माध्यम से शामिल होंगे। पांचवें वर्ष तक वार्षिक प्रवेश क्षमता लगभग 3,913 शिक्षार्थियों तक पहुंचने अनुमान है। 
 

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