Edited By Tanuja,Updated: 29 Jun, 2026 05:39 PM

चीन ने छह वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों, पूर्व वित्तीय नियामक ली युनजे और पूर्व पोलितब्यूरो सदस्य मा जिंगरुई सहित कई नेताओं का नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (NPC) की सदस्यता समाप्त कर दी। कारण सार्वजनिक नहीं किए गए, लेकिन इसे राष्ट्रपति शी जिनपिंग के जारी...
International Desk: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने अभियान को और तेज करते हुए छह वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों, पूर्व वित्तीय नियामक ली युनजे तथा हाल ही में जांच के दायरे में आए पूर्व पोलितब्यूरो सदस्य मा जिंगरुई को नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (NPC) की सदस्यता से हटा दिया है। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार यह फैसला एनपीसी की स्थायी समिति की बैठक में लिया गया। हालांकि, अधिकारियों को हटाने के पीछे कोई आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया गया।
सेना के जिन शीर्ष अधिकारियों पर गाज गिरी उनमें सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के इक्विपमेंट डेवलपमेंट विभाग के प्रमुख जनरल जू ज्यूकियांग, पीएलए वेस्टर्न थिएटर कमांड के राजनीतिक कमिश्नर जनरल ली फेंगबियाओ, पीएलए एयर फोर्स के राजनीतिक कमिश्नर जनरल गुओ पुक्सियाओ, ईस्टर्न थिएटर कमांड के लेफ्टिनेंट जनरल वांग कांगपिंग, साइबरस्पेस फोर्स के लेफ्टिनेंट जनरल झांग मिंगहुआ व पीएलए आर्मी के लेफ्टिनेंट जनरल यिन होंगक्सिंग शामिल हैं । इन सभी का एनपीसी प्रतिनिधि का दर्जा समाप्त कर दिया गया।
कार्रवाई का सबसे चर्चित नाम जनरल जू
कार्रवाई का सबसे चर्चित नाम जनरल जू ज्यूकियांग हैं। वे न केवल पीएलए के सैन्य उपकरण विकास और खरीद प्रणाली की निगरानी करते थे, बल्कि 2022 से चीन के मानवयुक्त अंतरिक्ष कार्यक्रम (Manned Space Programme) के कमांडर-इन-चीफ भी थे। भ्रष्टाचार-विरोधी अभियान लगातार जारी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के सत्ता में आने के बाद से चीन में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में कम्युनिस्ट पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं,पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के शीर्ष अधिकारियों, रक्षा प्रतिष्ठान और सरकारी संस्थानों से जुड़े कई प्रभावशाली लोगों की जांच की गई है तथा उन्हें पदों से हटाया गया है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह अभियान भ्रष्टाचार पर कार्रवाई के साथ-साथ पार्टी और सेना पर केंद्रीय नेतृत्व की पकड़ मजबूत करने का भी संकेत देता है। चीन के रक्षा मंत्रालय ने इस मामले पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की है। एनपीसी की स्थायी समिति द्वारा जारी आदेश में भी हटाए गए अधिकारियों के खिलाफ किसी विशेष आरोप या कारण का उल्लेख नहीं किया गया। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि सभी अधिकारियों के खिलाफ औपचारिक जांच पूरी हो चुकी है या वे अभी भी जांच प्रक्रिया का हिस्सा हैं।