चीन में 200 रूसी सैनिकों की सीक्रेट ट्रेनिंग; पुतिन के करीबी ने दी मंजूरी, गोपनीय रिपोर्ट ने बढ़ाई भारत की टेंशन

Edited By Updated: 02 Jul, 2026 04:25 PM

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एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2025 में लगभग 200 रूसी सैनिकों ने चीन में रेडियोलॉजिकल, बायोलॉजिकल और केमिकल (RBC) सुरक्षा संबंधी प्रशिक्षण लिया। चीन ने इस दावे को खारिज किया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि यह सही है तो रूस-चीन रक्षा सहयोग भारत के...

International Desk: रूस और चीन के बढ़ते रक्षा सहयोग को लेकर एक नई रिपोर्ट सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने गोपनीय रूसी दस्तावेजों के आधार पर दावा किया है कि वर्ष 2025 में करीब 200 रूसी सैनिकों ने चीन में विशेष सैन्य प्रशिक्षण लिया। हालांकि, चीन ने इस दावे को पूरी तरह निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है, जबकि रूस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2025 में रूस के रक्षा मंत्री आंद्रे बेलौसोव ने एक आंतरिक आदेश जारी कर रूसी सैन्य प्रतिनिधिमंडल को चीन भेजने की मंजूरी दी थी। बताया गया है कि प्रशिक्षण लगभग तीन सप्ताह तक चला और इसमें कम से कम चार रूसी और चीनी जनरल भी शामिल थे। यह प्रशिक्षण चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की सैन्य सुविधाओं में आयोजित किया गया।

 

रॉयटर्स के मुताबिक, इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य रेडियोलॉजिकल, बायोलॉजिकल और केमिकल (RBC) सुरक्षा था। रूसी सैनिकों को परमाणु, रासायनिक और जैविक हमलों से बचाव, रेडिएशन और केमिकल रिकॉनिसेंस तथा वेंटिलेशन सिस्टम को प्रदूषण से सुरक्षित रखने जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि सैनिकों ने परमाणु रिएक्टर के मॉडल पर व्यावहारिक अभ्यास किया। दूसरी ओर, चीन के विदेश मंत्रालय ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि "संबंधित आरोप पूरी तरह निराधार हैं।" चीन ने दोहराया कि यूक्रेन युद्ध पर उसका रुख नहीं बदला है और वह खुद को शांति वार्ता का समर्थक तथा मध्यस्थ मानता है। वहीं रूस के रक्षा मंत्रालय और क्रेमलिन ने इस रिपोर्ट पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है।

 

विश्लेषकों का मानना है कि यदि रॉयटर्स की रिपोर्ट सही साबित होती है, तो यह भारत के लिए रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हो सकती है। भारत की सेना आज भी बड़ी संख्या में रूसी रक्षा उपकरणों का उपयोग करती है। ऐसे में रूस और चीन के बीच बढ़ता रक्षा सहयोग भविष्य में सुरक्षा और रक्षा आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा कर सकता है। हालांकि, इस संबंध में भारत सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस और चीन के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और कूटनीतिक सहयोग लगातार बढ़ा है। दोनों देशों ने कई संयुक्त सैन्य अभ्यास भी किए हैं और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक-दूसरे के साथ तालमेल बढ़ाया है। फिलहाल यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह जानकारी रॉयटर्स द्वारा प्राप्त गोपनीय दस्तावेजों पर आधारित है। चीन इन दावों से इनकार कर चुका है और स्वतंत्र रूप से इन दस्तावेजों तथा कथित प्रशिक्षण की पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
 

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