भारत के साथ रिश्तों पर चीन का संदेश: मतभेद सुलझाओ और भरोसा बढ़ाओ, हम प्रतिद्वंद्वी नहीं साझेदार

Edited By Updated: 11 Feb, 2026 07:25 PM

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भारत-चीन रणनीतिक वार्ता के बाद चीन ने कहा कि दोनों देशों को संबंधों को दीर्घकालिक और रणनीतिक दृष्टि से देखना चाहिए। बीजिंग ने मतभेदों को सही तरीके से सुलझाने, सहयोग बढ़ाने और सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखने पर जोर दिया।

Bejing: भारत और चीन के बीच नई दिल्ली में हुई भारत-चीन रणनीतिक वार्ता के बाद चीन ने दोनों देशों से मतभेदों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से सुलझाने की अपील की है। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि नई अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में भारत और चीन को सहयोग बढ़ाना चाहिए और रिश्तों को स्थिर दिशा में आगे ले जाना चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है, जब विदेश सचिव विक्रम मिसरी और उनके चीनी समकक्ष मा झाओक्सू के बीच व्यापक रणनीतिक बातचीत हुई। मा झाओक्सू भारत में आयोजित ब्रिक्स शेरपा बैठक में भाग लेने के लिए आए हुए हैं। चीन के विदेश मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय हालात, दोनों देशों की आंतरिक और बाहरी नीतियों, साझा हितों से जुड़े वैश्विक मुद्दों और भारत-चीन संबंधों पर मित्रतापूर्ण, स्पष्ट और गहन चर्चा की।

 

बीजिंग ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत और चीन को मिलकर काम करना चाहिए और राष्ट्रपति शी जिनपिंग तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बनी महत्वपूर्ण सहमतियों को गंभीरता से लागू करना चाहिए। चीन ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों को यह रणनीतिक समझ बनाए रखनी चाहिए कि भारत और चीन प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि सहयोगी साझेदार हैं और एक-दूसरे के लिए विकास का अवसर हैं, खतरा नहीं। विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया कि दोनों देशों को आपसी विश्वास मजबूत करने, सहयोग बढ़ाने, मतभेदों को सही तरीके से सुलझाने और संबंधों को स्थिर एवं सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने की जरूरत है।

 

दोनों पक्षों ने 2026 और 2027 में ब्रिक्स की अध्यक्षता के दौरान एक-दूसरे का समर्थन करने पर भी सहमति जताई। साथ ही बहुपक्षवाद, संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका, ‘ग्लोबल साउथ’ की एकता, अंतरराष्ट्रीय न्याय और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को मजबूत करने पर सहमति बनी। भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपनी विज्ञप्ति में कहा कि वार्ता का मुख्य फोकस द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने और पुनर्निर्माण पर रहा। बातचीत में सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता को द्विपक्षीय रिश्तों की प्रगति के लिए बेहद जरूरी बताया गया।

 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि दोनों पक्षों ने संबंधों में आई “सकारात्मक गति” की समीक्षा की और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने तथा संवेदनशील मुद्दों पर चिंताओं को दूर करने पर चर्चा की। हालांकि इन मुद्दों का विस्तार से उल्लेख नहीं किया गया, लेकिन माना जा रहा है कि इसमें दुर्लभ पृथ्वी खनिजों पर चीन के निर्यात नियंत्रण जैसे विषय शामिल हैं। भारत ने कैलाश मानसरोवर यात्रा के सफल पुनः आरंभ का भी जिक्र किया और इसके दायरे के विस्तार की उम्मीद जताई। दोनों पक्षों ने वीजा सुविधा को आसान बनाने और लोगों के बीच आदान-प्रदान बढ़ाने पर भी सहमति जताई। गौरतलब है कि पूर्वी लद्दाख में चार साल से अधिक चले सैन्य गतिरोध के बाद अक्टूबर 2024 में एलएसी पर तनाव कम होने के संकेत मिले थे, जिसके बाद दोनों देशों ने रिश्तों को सामान्य बनाने की दिशा में कई कदम उठाए हैं।

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